
भविष्य का तीर्थ होगा शैव ग्राम
मेरा यह मत है कि भविष्य की पीढ़ियां ‘धर्म’ शब्द के उस कर्मकांडीय और अवैज्ञानिक पारलौकिक…

मेरा यह मत है कि भविष्य की पीढ़ियां ‘धर्म’ शब्द के उस कर्मकांडीय और अवैज्ञानिक पारलौकिक…

भगवान और अवतारवाद की अवधारणा ने भारतीय समाज को विकलांग कर दिया ! विकृत आस्था से…

भारतीय दर्शन का एक मूलभूत और शाश्वत सिद्धांत है, “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्”। अर्थात्, धर्म, अर्थ, काम…

भारतीय दर्शन में भी महर्षि कालिदास ने कहा है कि “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्”, अर्थात शरीर ही…

भगवान कबीले से साम्राज्य तक मानव सभ्यता के क्रमिक विकास में ‘ईश्वर’ या ‘देवता’ की अवधारणा…

मानव का ईश्वर या परमात्मा से संबंध हमेशा से ही आस्था और विश्वास की नींव पर…

जब आप किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराते हैं, तो वह कृत्य प्रायः करुणा और अंतरात्मा…

प्रकृति की अपनी एक स्वचालित और संतुलित व्यवस्था है, जहाँ प्रत्येक कार्य का एक निश्चित कारण…

आध्यात्मिक पवित्रता, मोक्ष या उच्च चेतना के नाम पर शिष्यों के गुप्तांग काटने या नपुंसक बनाने…