जानिए विवाह उपरान्त भाग्य उदय क्यों !! : Yogesh Mishra

विवाह मानव जीवन का एक प्रमुख संस्कार है ! विवाह के बाद एक युवक ओर युवती को आजीवन एक साथ रहना होता है ! शास्त्रों में पत्नी को “अर्द्धांगिनी” कहा गया है ! पति का दुःख ओर सुख पत्नी का…

विवाह मानव जीवन का एक प्रमुख संस्कार है ! विवाह के बाद एक युवक ओर युवती को आजीवन एक साथ रहना होता है ! शास्त्रों में पत्नी को “अर्द्धांगिनी” कहा गया है ! पति का दुःख ओर सुख पत्नी का…

“संतान होगी भी या नही?” इस विषय पर ज्योतिष शास्त्र में महर्षि पराशर ने बहुत स्टीक ग्रह गणना पद्धति प्रस्तुत की है ! पुरुष के लिए “बीज स्फुट” और स्त्री के लिए “क्षेत्र स्फुट” ! हालांकि इस ग्रह गणना के…

नारायण नागबली छविनारायण नागबलि यह दोनो अनुष्ठान पद्धतियां संतान सुख की अपूर्ण इच्छा, कामना पूर्ति के उद्देश से किय जाते हैं ! इसीलिए यह दोनो अनुष्ठान काम्य प्रयोग कहलाते हैं ! वस्तुत: नारायणबलि और नागबलि यह अलग-अलग पूजा अनुष्ठान हैं…

भगवान शिव की पूजा या आराधना एक गोलाकार पत्थर के रूप में की जाती है जिसे पूजा स्थल के गर्भगृह में रखा जाता है ! सिर्फ भारत और श्रीलंका में ही नहीं, भारत के बाहर विश्व के अनेक देशों में…

वैष्णव जीवन शैली लाखों वर्ष बाद विकसित हुई और उसने विश्व पर शैव जीवन शैली को प्रतिस्थापित कर शासन किया ! शिव भक्ति के विषय में प्रारंभिक जानकारी सिंधुघाटी से प्राप्त होती है ! ऋग्वेद में शिव से साम्य रखने…

तान्त्रिक संस्कृति में मूलतः साम्य रहने पर भी देश, काल, क्षेत्र, भेद से उसमें विभिन्न सम्प्रदायों का आविर्भाव हुआ है ! इस प्रकार का भेद साधकों के प्रकृति -गत भेद के अनुरोध से स्वभावतः ही होता हैं ! भावी पीढी…

षड्यंत्र एक पौराणिक शब्द है ! यह तंत्र का विषय है, किन्तु षड्यंत्र का सामान्य अर्थ साज़िश, धोखा देने की योजना, दुरभिसन्धि, गुप्तरूप से की जाने वाली कार्रवाई आदि के रूप में लिया जाता है ! किंतु विश्लेषणात्मक रूप से…

सनातन ज्ञान अनादि अन्नत है ! उसे शब्दों में बांधना ही सम्भव नहीं है ! किन्तु अगली पीढ़ी के लिये यह लेख लिखा जा रहा है ! जिससे वह भी सनातन ज्ञान को एक दृष्ठि में जान सकें क्योंकि अब…

सभी सनातन धर्म को मानाने वाले जानते हैं कि साधना 20 डिग्री से काम तापमान पर जितनी अच्छी तरह हो सकती है अन्य उच्च तापमान पर सम्भव नहीं है ! क्योंकि कि 20 डिग्री से कम तापमान पर पसीना नहीं…

कई बार परिस्थितियों के आगे मजबूर होकर व्यक्ति को कर्ज लेने की नौबत आ जाती है और फिर कर्ज खत्म होने का नाम नहीं लेते ! इसका कारण वास्तु दोष भी हो सकता है ! एक कर्ज उतरा नहीं कि…