तंत्र शैव आध्यात्मिक उपचार पध्यति की एक विधा है ! Yogesh Mishra

तंत्र का नाम आते ही लोगों के ज़हन में एक कंकाल, खोपड़ी, ढेर सारी जलती हुई अगरबत्तियां, आदि दिमाग में आती हैं ! लोग इसे जादू-टोना, टोटका भी कहते हैं ! और यही वजह है कि लोग इससे दूर भागते हैं ! सच पूछिए तो तंत्र विद्या ईश्‍वरीय शक्ति और मनुष्‍य की आत्‍मा के बीच संपर्क जोड़ने का साधन है, जिसकी सही परिभाषा जल्‍दी नहीं मिलती !

इस विद्या के बारे में- तंत्र, का संधि- विच्छेद करें तो दो शब्द मिलते हैं – तं- अर्थात फैलाव और त्र अर्थात बिना रुकावट के ! ऐसा फैलाव या नेटवर्क जिसमें कोई रुकावट या विच्छेद न हो ! जो एकाकी हो, जो अनंत में फैला हुआ हो ! सतत हो ! इसलिए तंत्र अनंत के साथ जुड़ने का एक साधन है ! कभी किसी दूसरी संस्कृति ने इश्वर तक पहुँचने के लिए इतनी गहन विचारणीय शब्द का प्रयोग शायद ही किया होगा !

तंत्र द्वैत को नहीं मानता है ! तंत्र में मूलभूत सिद्धांत है की ऐसा कुछ भी नहीं है, जो की दिव्य न हो ! तंत्र अहंकार को पूरी तरह समाप्त करने की बात करता है, जिससे द्वैत का भाव पूर्णतया विलुप्त हो जाता है ! तंत्र पूर्ण रूपांतरण की बात करता है ! ऐसा रूपांतरण जिससे जीव और ईश्वर एक हो जाएँ ! ऐसा करने के लिए तंत्र के विशेष सिद्दांत तथा पद्धतियां हैं, जो की जानने और समझने में जटिल मालूम होती हैं !

भारत में तंत्र का इतिहास सदियों पुराना है ! ऐसा मन जाता है सर्वप्रथम भगवन शिव ने देवी पारवती को विभिन अवसरों पर तंत्र का ज्ञान दिया है ! योग में तंत्र का विशेष महत्व है ! योग तथा तंत्र दोनों, अध्यात्मिक चक्रों की शक्ति को विकसित करने की विभिन्न पद्धतियों के बारे में बताते हैं ! हठयोग और ध्यान उनमें से एक है ! विज्ञानं भैरब तंत्र जो की 112 ध्यान की वैज्ञानिक पद्धति है भगवान शिव ने देवी पारवती को बताई है ! जिसमें सामान्‍य जीवन की विभिन अवस्थाओं में ध्यान करने की विशेष पद्धति वर्णित है !

तंत्र का लिखित प्रमाण लगभाग मध्य कालीन इतिहास से मिलना शुरू हो जाता है ! इसीलिए लगभग सभी धर्मों में जीवन की समस्याओं का हल तंत्र के माध्यम से बताया गया है ! अति गोपनीय तांत्रिक पद्धति में योनी तंत्र का विशेष महत्व है ! इस ग्रन्थ में, दस महाविद्या (देवी के दस तांत्रिक विधिओं से उपासना) वर्णित है ! तंत्र मंत्र की सभी तांत्रिक कियाएं जिनमें – सम्मोहन, वशीकरण, उचाटन मुख्य हैं, मंत्र महार्णव तथा मंत्र महोदधि नामक ग्रंथों में वर्णित हैं !

तंत्र अहंकार को समाप्त कर द्वैत के भाव को समाप्त करता है, जिससे मनुष्य, सरल हो जाता है और चेतना के स्तर पर विकसित होता है ! सरल होने पर इश्वर के संबंध सहजता से बन जाता है ! तंत्र का उपयोग इश प्राप्ति की लिए सद्भावना के साथ करना चाहिए !

तंत्र का जुडाव प्रायः मंत्र, योग तथा साधना के साथ देखने को मिलता है ! तंत्र, गोपनीय है, इसलिए गोपनीयता बनाये रखने के लिए प्रायः तंत्र ग्रंथों में प्रतीकात्मकता का प्रयोग किया गया है ! कुछ पश्च्यात देशों में तंत्र को शारीरिक आनंद के साथ जोड़ा जा रहा है, जो की सही नहीं है ! यदपि तंत्र में काम शक्ति का रूपांतरण, दिव्य अवस्था प्राप्ति की लिए किया जाता है ! इससे बड़े बड़े पर कार्य हो जाते हैं अपितु बिना योग्य गुरु के भयंकर भूल होने की पूर्ण संभावना रहती है !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

 -: सम्पर्क :-
-090 444 14408
-094 530 92553

comments

Check Also

क्या रावण की वास्तविक “रक्ष राष्ट्र” वर्तमान हिन्द महासागर में समा गया था : Yogesh Mishra

तमिल लेखकों के अनुसार आधुनिक मानव सभ्यता का विकास, अफ्रीका महाद्वीप से न होकर हिन्द …