रावण द्वारा रम्भा के बलात्कार का सच अवश्य पढ़ें : Yogesh Mishra

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण पर आरोप है कि उसने कुबेर के पुत्र नल कुबेर की होने वाली पत्नी रम्भा का बलात्कार किया था ! जिसे रामायण में इस प्रकार लिखा गया है ! “एवमुक्त्वा स तां रक्षो निवेश्य च शिलातले !” इस श्लोक का अर्थ यह है कि राक्षसराज रावण ने रम्भा को बलपूर्वक शिला पर बिठाया और फिर कामभोग में लीन होकर बलपूवक उसके साथ समागम किया ! लेकिन इस पूरे के पूरे आरोप में बाल्मीकि ने कहीं भी यह नहीं बताया कि बलात्कार के समय रावण और रंभा की आयु क्या थी !

क्योंकि जैसा कि शास्त्र बतलाते हैं कि रंभा समुद्र मंथन के समय समुद्र से अप्सरा के रूप में प्राप्त हुई थी ! जिसे इंद्र अपने अप्सरा भोग के लिये अपने साथ इंद्रलोक ले आया था ! समुद्र मंथन और रावण की आयु के मध्य कम से कम विष्णु के 4 अवतारों का वर्णन है !

विष्णु का कश्यप अवतार समुद्र मंथन के समय हुआ था ! इसके बाद सतयुग में हिरण्याक्ष की हत्या के लिये विष्णु का वराह अवतार लिया था ! लाखों साल बाद फिर हिरण्याक्ष के बड़े भाई हिरणाकश्यप की हत्या के लिये पुनः विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था ! इसके बाद प्रह्लाद के पुत्र बाली को छलने के लिये पुनः विष्णु ने बावन अवतार लिया था ! तब जाकर त्रेतायुग में रावण के वध के लिये पुनः विष्णु ने राम अवतार लिया !

इस बीच में सतयुग समाप्त हो गया और त्रेता युग प्रारंभ हो गया ! अर्थात विष्णु के सतयुग के कश्यप अवतार से लेकर त्रेता में भगवान राम के समय के मध्य कम से कम सात लाख वर्षों का समय बीत गया ! अब प्रश्न यह है की सात लाख साल पुरानी बूढ़ी औरत से रावण क्यों बलात्कार करेगा ! अब पुन: मुर्ख इस पर बिना प्रमाण का तर्क करेंगे !

अब हम सत्यता का वर्णन शोध और बुद्धि के अनुसार करते हैं ! जब रावण ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके कुबेर से देवताओं द्वारा निर्मित सोने की लंका छीन ली और कुबेर को लंका से निष्कासित कर दिया ! तब कुबेर अपने नाना महर्षि भरद्वाज के पास प्रयागराज में परामर्श के लिये गये और भरद्वाज ऋषि ने कुबेर को वर्तमान तिब्बत में जाकर निवास करने की सलाह दी ! क्योंकि वहां पर सोने की सर्वाधिक खजाने थी जो देवताओं के नियंत्रण में थी ! जिसका सञ्चालन और नियंत्रण के कारण कुबेर को देवताओं के धन का रक्षक कहा गया है !

इसी बीच असुरों के वास्तु विशेषज्ञ भवन निर्माता राजा मय दानव से इंद्र ने अपने लिये असुर वास्तुकला के अनुरूप भवन निर्माण का आग्रह किया ! जिसको राजा मय दानव ने मना कर दिया ! परिणामत: क्रोध से तिलमिला इंद्र ने राजा मय दानव की पत्नी हेमा का अपहरण कर लिया ! तब इंद्र के प्रभाव से भयभीत होकर राजा मय दानव ने अपनी जवान बेटी मंदोदरी का विवाह उस समय के नवोदित राजा रावण के साथ कर दिया ! जिससे मंदोदरी का जीवन सुरक्षित हो सके !

रावण के विश्व विजय अभियान के बाद जब रावण वापस आया और उसके विश्वविजय का उत्सव मनाया गया ! जिसमें मंदोदरी खुश नहीं थी ! जिस कारण जब रावण ने पूछा तो मंदोदरी ने बताया कि मेरी मां अर्थात आपकी सास हेमा इंद्र के कब्जे में है ! इसलिये मैं हृदय से खुश नहीं हूं ! तब रावण ने अपने पुत्र मेघनाथ को आदेशित किया कि फौज लेकर जाओ और इंद्र के कब्जे से अपनी नानी हेमा को मुक्त करा कर लाओ ! मेघनाथ गया इंद्र को युद्ध में परास्त कर अपनी नानी को इंद्र के कब्जे से छुड़ाया ! साथ में इंद्र को भी गिरफ्तार करके ले आया !

बाद को क्षमा याचना मांगने पर रावण ने इंद्र को कुछ शर्तों के साथ मुक्त कर दिया ! तब इंद्र अपने इंद्रलोक पहुंचकर रावण के यश कीर्ति को खराब करने के लिये एक षड्यंत्र रचा ! उसने कुबेर से सांठगांठ की और कहा कि रावण तुम्हारा भाई है ! तुम उसे अपने यहां संगीत की प्रतियोगिता में आमंत्रित करो और मेरी अप्सरा व अपने पुत्र की होने वाली पत्नी रंभा के द्वारा उसके ऊपर बलात्कार का आरोप लगा दो ! जिससे पूरे विश्व में उसकी छवि खराब हो जायेगी !

कुबेर क्योंकि पहले से ही तिलमिलाया बैठा था ! अत: उसने इंद्र के इस परामर्श को तत्काल प्रभाव से लागू किया और अपने पुत्र की होने वाली पुत्रवधू के साथ एक संगीत का प्रतियोगी कार्यक्रम आयोजित किया ! जिसमें वीणा वादन का दायित्व रावण को दिया गया ! और नृत्य का दायित्व रंभा को दिया गया !

शर्त यह थी कि यदि रावण पहले हार जाता है तो उसे रंभा की अधीनता उसे स्वीकार करनी पड़ेगी और अगर रंभा पहले थक जाती है तो उसे रावण की अधीनता स्वीकार करनी पड़ेगी ! सार्वजनिक उत्सव में रंभा रावण से हार गई और अपने अपमान का बदला लेने के लिये उसने अपने ससुर और इंद्र के बहकावे में आकर रावण के ऊपर बलात्कार का आरोप लगा दिया ! जो कि एक विशुद्ध राजनैतिक षडयंत्र था ! जिसकी चर्चा नारद जैसे सेवकों के माध्यम से पूरी दुनिया में फैलाया गया !

अब प्रश्न यह है कि अगर रावण द्वारा रंभा का बलात्कार किया गया था ! तो उस से उत्पन्न होने वाली संतान कहां है ! उसका नाम क्या था और क्या रावण जो त्रिलोक विजेता था ! वह नहीं जानता था कि यदि वह पुत्रवधू के साथ बलात्कार करेगा तो उसकी त्रिलोक विजेता की छवि को दूषित हो जाएगी ! इस छवि की रक्षा के लिये वह लगे हाँथ रम्भा की हत्या भी न कर देता ! रावण जैसा कूटनीतिक व्यक्ति जिसके पास हर तरह की सुविधा उपलब्ध थी वह क्षणिक सुख के लिये कुबेर की पुत्रवधू रम्भा के साथ इस तरह का दुष्कर्म करके उसे जिन्दा क्यों छोड़ता !

अगर इस घटना में सत्यता थी तो बलात्कार के समय रावण कुबेर के राज्य में ही अतिथि के तौर पर आमंत्रित था ! उस समय तत्काल कुबेर या देवताओं की सेना ने बलात्कार के आरोप में रावण को गिरफ्तार क्यों नहीं किया या दंडित क्यों नहीं किया !

जबकि इस घटना के अलावा पूरे जीवन में कभी भी, कहीं भी, कोई भी बलात्कार का आरोप रावण के ऊपर नहीं लगा ! यदि रावण कामुक प्रवृति का होता तो उसके ऊपर बलात्कार के अनेकों आरोप लगते या वह किसी विशेष स्त्री के सुख को पाने के लिये जगह जगह युद्ध करता फिरता !

अतः इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि रावण ने रंभा के साथ कोई बलात्कार नहीं किया था ! बल्कि संगीत प्रतियोगिता में हारने के कारण अपमानित हुई रंभा के भावुकता का लाभ उठाकर कुबेर और इंद्र के उकसाने पर उसने रावण के ऊपर बलात्कार का आरोप लगाया था ! जिसे बाद को वैष्णव ग्रंथकारों ने वैष्णव राजाओं की चाटुकारिता में बढ़ा चढ़ाकर अपने अपने तरीके से अलग अलग ग्रंथों में प्रस्तुत किया ! इसमें कहीं कोई सत्यता नहीं दिखलाई देती है ! जब कोई घटना असत्य और काल्पनिक होती है तो उसके व्यवस्थित साक्ष्य नहीं मिलते हैं ! यही इस आरोप के साथ भी हुआ है !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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