क्या विश्व सत्ता वर्तमान शिक्षा पध्यति को निगल जायेगा : Yogesh Mishra

कोरोना काल का सबसे ज्यादा असर भारत की वर्तमान शिक्षा नीति पर पड़ा है ! अभी तक जो बच्चे अपने घरों से बाहर रहकर दूसरे शहरों में कोचिंग या शिक्षा ग्रहण करते थे ! इसको और इनके परिवार वालों को कोरोना के कारण हुयी अव्यवस्थित लाक बन्दी ने सबसे ज्यादा भयभीत कर दिया है !

इसका असर यह पड़ा कि अब अगले दो-तीन वर्षों तक यह अनुमान लगाया जाता है कि माता-पिता बच्चों को शहरों के बाहर कोचिंग या शिक्षा ग्रहण करने के लिये नहीं भेजेंगे ! यही विश्व सत्ता की मंशा भी थी ! जिससे आने वाली पीढ़ी सम्पूर्ण विश्व में एक ही केंद्र से एक ही पाठ्यक्रम की शिक्षा ऑनलाइन इंटरनेट द्वारा ले ! जिससे आने वाले समय में विश्व के इतिहास ही नहीं भूगोल को भी बिना किसी हिंसा के बदला जा सके !

जिस वजह से निकट भविष्य में ऑनलाइन इंटरनेट द्वारा शिक्षा देने का मार्केट बहुत तेजी से बढ़ने वाला है ! इसका एक लाभ यह भी होगा कि अब मात्र योग्य टीचरों के द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम ही हर बच्चे के लिये इंटरनेट पर सहज उपलब्ध होगा ! जिससे शिक्षा की दिशा, पाठ्यक्रम हर बच्चे के लिये समान रूप से उपलब्ध होगा ! जिसमें अर्थाभाव किसी भी तरह से बाधा नहीं होगा !

वरना अभी तक धन के अभाव में प्राय: बच्चे योग्य टीचर द्वारा शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते थे क्योंकि जिन कोचिंग में योग्य टीचर पढ़ाया करते थे ! उन कोचिंग की फीस इतनी ज्यादा होती थी कि वहां पर समाज के हर वर्ग के बच्चे के लिये पढ़ना संभव नहीं हो पाता था ! क्योंकि हर कोचिंग के क्लासरूम की एक अपनी निश्चित क्षमता होती है !

लेकिन अब जब से ऑनलाइन एजुकेशन का चलन कोरोना वायरस काल में अनिवार्य हुआ है ! तब से अब क्लास रूम के क्षमता की बात ही खत्म हो गई ! अब तो एक योग्य टीचर सैकड़ों बच्चों को एक साथ पढ़ा सकेगा ! विश्व विद्यालय का आकार भी अब घट कर छोटी छोटी बहुमंजिला बिल्डिंग में बदल जायेगा क्योंकि अब क्लास रूम तो होंगे नहीं, बस फैकल्टी और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक की ही आवश्यकता रह जायेगी !

हर बच्चे पर नियंत्रण अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा सीधा शिक्षण संस्थाओं का होगा और आवश्यकता पड़ने पर छात्र को वीडियो या उसके द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम भी बच्चों को इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त हो जायेगा !

ऐसी स्थिति में कम योग्यता वाले टीचरों का भविष्य अब अच्छा नहीं है ! अब उनके आगे दो ही विकल्प हैं या तो वह लोग अपने शिक्षा और बौद्धिक स्तर में विकास करें या फिर छात्रों को पढ़ाने का काम छोड़कर किसी अन्य जीवकोपार्जन के कार्य में लग जायें !

क्योंकि तकनीक की मदद से आने वाला समय अब मात्र योग्य टीचरों का ही है ! अब इंटरनेट विद्यालय और विश्वविद्यालयों का भी दौर शुरू हो जायेगा ! बच्चा अपने घर पर रहकर ही नये प्रजाति के विद्यालय या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेगा और अपने घर पर बैठे-बैठे ही वह योग्य शिक्षकों से शिक्षा ग्रहण करेगा ! उसे अब योग्य शिक्षकों से शिक्षा ग्रहण करने के लिये किसी भी दूसरे शहर या दूसरे स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी !

बहुत जल्द ही पहले अनुपातिक रुप से फिर क्रमशः तकनीकी के विकास के साथ-साथ आने वाले समय में शतप्रतिशत रूप से शिक्षा इंटरनेट द्वारा होने जा रही है ! बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, विद्यालय और विश्वविद्यालय की बिल्डिंगों में जाकर अब छात्र शिक्षा नहीं लेंगे बल्कि निकट भविष्य में अब व्यावहारिक शिक्षा पर अधिक जोर होगा ! व्यक्ति सीधा फैक्टरी, रासायनिक लेब, न्यायालय, युद्ध सामग्री निर्माण स्थल, तकनीकी केंद्र आदि पर स्नातक काल में शिक्षा ग्रहण करेगा !

इस दिशा में बहुत से नये प्रोग्राम और नई कंपनियां भारत में प्रवेश करने वाली हैं ! जो विश्व सत्ता की शिक्षा जगत में नयी मंशा के तहत भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व की परंपरागत शिक्षा पद्धति को पूरी तरह खत्म कर देगी और अब शिक्षा जगत में आने वाला युग यह नये प्रोग्राम और नई पध्यति के साथ एकदम नये रूप में एकल कंपनियों के शक्ल में होगा ! जिनका शिक्षा जगत पर एकाधिकार होगा !

अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो अब नये शिक्षा जगत में लोर केजी से लेकर पी.एच.डी. तक के सारे सब्जेक्ट और उनका सारा पाठ्यक्रम पूरे विश्व में किसी भी एक केंद्र से ही संचालित होगा ! उनमें जो योग्य बच्चे होंगे उनको उनके शिक्षा काल में ही नौकरी, व्यापार, व्यवसाय करने के लिये भी प्रशिक्षित कर दिया जायेगा ! जिससे आने वाले युग में शिक्षा समाप्त होने के साथ ही बच्चे तत्काल रोजगार प्राप्त कर सकेंगे ! जिससे समाज में डिग्री लेकर भटकते रहने की प्रक्रिया अब खत्म हो जायेगी ! लेकिन आने वाले समय में विश्व की आबादी 700 करोड़ नहीं बल्कि बस मात्र 50 करोड़ होगी ! शेष विश्व सत्ता के लिये अनुपयोगी 650 करोड़ लोग शीघ्र ही वायरस वार, युद्ध, गुप्त रोग, अकाल, भुखमरी आदि से इस दुनिया से विदा ले लेंगे !

यही सत्य है ! लेकिन अब टीचर और छात्र के बीच के जो व्यक्तिगत पारस्परिक संबंध होते थे वह अब नहीं होंगे ! जिनके द्वारा बहुत सा ऐसा ज्ञान जो किताबों और शब्दों से नहीं बस भावनाओं से दिया जा सकता है वह अब आने वाली पीढ़ियों को नहीं मिलेगा ! बल्कि यह कहिये कि अब उस तरह के अनुभव आधारित ज्ञान का दौर अब समाप्त होने वाला है ! यह पूरी की पूरी व्यवस्था और उसका प्रशिक्षण कोरोना काल में ही स्थापित किया गया है ! क्योंकि यही विश्व सत्ता की मंशा है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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