क्या विश्व में जैविक युद्ध शुरू हो गया है : Yogesh Mishra

जैविक हथियारों में वायरस, बैक्टीरिया, फंगी जैसे सूक्ष्म जीवों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है ! यह सभी मानवता और प्रकृति के लिये बेहद खतरनाक साबित होते हैं क्योंकि आमतौर पर शुरुआत में तो इसका पता नहीं चलता है !

और जब तक पता चलता है, तब तक मनुष्य और प्रकृति के स्वास्थ्य का भारी नुकसान हो चुका होता है ! एंथ्रैक्स, बोटुलिनम और प्लेग, इबोला और लासा वायरस इसके कुछ जीते जागते उदाहरण है ! इस तरह के खतरनाक जैविक हथियार इंसान, जानवरों और पेड़-पौधों आदि सभी की नस्लों का सफाया करने का सामर्थ रखते हैं !

अमेरिका और सोवियत रूस द्वारा रासायनिक और जैविक हथियारों का सबसे बड़ा जखीरा शीत युद्ध के दौरान जमा किया गया था ! इस जखीरे की स्थिती क्या है, यह कहना थोड़ा मुश्किल है ! अमेरिका के आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के मुताबिक, साल 1997 में केमिकल वेपन कन्वेंशन हुई ! इस पर दस्तखत करने वाले आठ देशों ने जानकारी दी कि उनके पास कितने ऐसे हथियार हैं ! यह देश थे, अल्बानिया, भारत, इराक, लीबिया, सीरिया, अमेरिका, रूस और एक अज्ञात देश, जिसका नाम कभी बाहर नहीं आया !

अमेरिका के अलावा अन्य सभी देशों ने अपने घोषित जखीरे को नष्ट कर दिया है ! अमेरिका आज भी योजना बना रहा है ! हालांकि केमिकल हथियार नष्ट करने के सीरिया के दावे पर लगातार सवाल उठते रहे हैं ! केमिकल हथियारों से जुड़े मामलों की देखरेख के लिए बनी अंतरराष्ट्रीय संस्था- ऑर्गेनाइजेशन फॉर द प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वीपंस (ओपीसीडब्ल्यू) सीरिया के दावों पर शक जताता रहा है !

अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से केमिकल और बायोलॉजिकल हथियारों का इस्तेामल प्रतिबंधित है ! साल 1925 में तय हुए जिनेवा प्रोटोकॉल में तय किया गया था कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिरोध या युद्ध में रासायनिक या जैविक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा ! लेकिन इस कन्वेंशन से पहले और बाद में भी केमिकल हथियारों का इस्तेमाल होता रहा है !

पुरातात्विक साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि सदियों पहले प्राचीन फारस और रोमन सेनाओं के युद्ध में बिटुमिन और सल्फर के क्रिस्टलों का इस्तेमाल हुआ था !

कहा जाता है कि साल 1347 में मुगलों ने प्लेग से संक्रमित शरीरों का इस्तेमाल काले सागर के बंदरगाह पर किया था ! 1710 में रूसी सेना ने भी रवाल (मौजूदा टालिन, एस्टोनिया) में इसी तरह हमला किया था ! 1763 में ब्रिटेन की फौज ने चेचक से संक्रमित कंबल अमेरिकी इंडियन आबादी में बांट दिए थे, जिससे महामारी फैल गई थी !

1845 में फ्रांस ने अल्जीरिया के बेरबेर कबीले के खिलाफ धुएं वाले केमिकल हथियारों का इस्तेमाल किया था ! अमेरिकी गृह युद्ध में गुब्बारों के जरिये जहर के कनस्तर गिराए गए थे !

आधुनिक लड़ाइयों में क्लोरीन, फोसजीन और मस्टर्ड गैस का इस्तेमाल पहले विश्व युद्ध के दौरान किया गया है ! अमेरिका ने वियतनाम युद्ध में एजेंट ऑरेंज का इस्तेमाल किया था ! यह एक तरह का खरपतवार नाशक था ! इसमें ऐसे केमिकल थे कि लड़ाई के दशकों बाद तक वियतनाम के इस हिस्से में बच्चे अपंगता के साथ पैदा हुए और कई लोगों की मौत कैंसर से हुई !

साल 1675 में हुए स्ट्रासबुर्ग समझौते के बाद से केमिकल और बायोलॉजिकल हथियारों को सीमित करने और उत्पादन पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है ! इसके बावजूद यह हथियार आज भी दुनिया में हैं ! 2019 में जब चीन से कोविड-19 के मामले सामने आने शुरू हुए तो फिर से जैविक हथियारों के बारे में चर्चा होने लगी थी ! हालांकि कोविड-19 को चीन द्वारा बायोलॉजिकल हथियार बनाने का कोई भी सबूत आज तक सामने नहीं आया है ! यह विशुद्ध अमेरिका का प्रपोगंडा था ! यूक्रेन युद्ध में भी दोनों पक्षों की ओर से रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका लगातार जताई जा रही है !

यह स्पष्ट मान लीजिये कि अगर किसी भी छोटे या बड़े युद्ध में विश्व में कहीं भी केमिकल और बायोलॉजिकल हथियारों का प्रयोग हुआ तो इस पृथ्वी की पूरी मानवता और प्रकृति नष्ट होने के कगार पर आ जायेगी ! इसलिये सभी महाशक्तियों को इसके प्रयोग से बचना चाहिये !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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