मानव मस्तिष्क की सबसे गहरी और जटिल संरचना हमारा अवचेतन मन है। इसका प्राथमिक मनोवैज्ञानिक उद्देश्य हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करना और हमें किसी भी प्रकार के मानसिक आघात या भावनात्मक पीड़ा से बचाना है।
इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह ‘डिफेन्स मेकनिजम’ (रक्षा तंत्र) का निर्माण करता है। लेकिन, जीवन के एक पड़ाव पर आकर यही सुरक्षा कवच हमारी प्रगति और आत्म-विकास की सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।
जब भी हम जीवन में कुछ नया करने, पुरानी नकारात्मक आदतों को छोड़ने या अपनी कमियों का गहराई से सामना करने का प्रयास करते हैं, तो अवचेतन मन इसे एक ‘खतरे’ के रूप में देखता है। यह तुरंत अस्वीकरण, दमन या युक्तिकरण जैसे मनोवैज्ञानिक हथियारों का उपयोग करके हमें वापस हमारे परिचित ‘कम्फर्ट जोन’ में धकेल देता है।
हम अपनी विफलताओं या डरों को सही ठहराने के लिए तार्किक बहाने गढ़ने लगते हैं। यह एक प्रकार की पुरानी मानसिक प्रोग्रामिंग है, जो हमें इस भ्रम में रखती है कि हम सुरक्षित हैं, जबकि वास्तव में हमारी प्रगति रुक चुकी होती है।
इन्हीं मानसिक बेड़ियों को तोड़ने के लिये सनातन ज्ञान पीठ युवाओं के लिये एक विशेष कक्षा / शिविर गुरुदेव श्री योगेश कुमार मिश्र जी के मार्गदर्शन में आयोजित करने जा रहा है !
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सुशील कुमार जांगिड़
कार्यक्रम प्रमुख
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553
