इस विषय पर विशेष वैज्ञानिक सत्र आज रात्रि 8: 00 बजे ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है !
इस सृष्टि में ईश्वर के सबसे जटिलतम रहस्य का नाम यदि मुझसे पूछा जाये तो मैं मानव मस्तिष्क के कार्य पद्धति का ही नाम लूँगा !
क्योंकि मात्र अधिकतम डेढ़ किलो के इस मानव मस्तिष्क में 84 लाख तरह के रसायनों का निर्माण होता है ! जो मनुष्य ही नहीं प्रकृति को भी संचालित और मार्गदर्शित करता है !
इस मस्तिष्क से अट्ठारह करोड़ तरह की ऊर्जायें इस समस्त ब्रह्मांड को भेजी जा सकती हैं और वहां से इन्हीं ऊर्जाओं की मदद से संकेतों को प्राप्त करके उनकी अनुभूति कर उन्हें सामान्य शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है ! विश्व के सारे धर्म ग्रंथ इन्हीं ऊर्जाओं की अनुभूतियों पर लिखे गये हैं !
यह समर्थ इस दुनिया के किसी भी कंप्यूटर में न कभी रहा है और न ही कभी भविष्य में होगा ! चाहे कृत्रिम बुद्धि का विज्ञान अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कितना भी अधिक विकसित क्यों न हो जाये ! वह सदैव मानव मस्तिष्क से पीछे ही रहेगा !
आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा सामाजिक नियमों का अनुपालन तो करवा सकते हैं ! व्यक्ति को संदेश भेज सकते हैं और उस का संदेश प्राप्त कर सकते हैं ! किंतु प्रकृति की व्यवस्था यहीं पूर्ण नहीं होती है ! यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता मात्र शासकों के शासन की सुविधा में सहायक हो सकता है लेकिन ईश्वरीय व्यवस्था इस से बहुत भिन्न है ! जिसे मानव मस्तिष्क के ही अनुभूति कर समझ सकता है ! कोई भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का आधुनिकतम कंप्यूटर उस ईश्वरीय व्यवस्था को न तो अनुभूति कर सकता है और न ही समझ सकता है !
यदि ऐसा किया जाना संभव होता तो आज वर्तमान ब्रह्मांड के समानांतर जो दूसरे ब्रह्मांड हैं वहां पर विकसित देव ऊर्जाओं से आज का आधुनिक विज्ञान संपर्क कर चुका होता और उन देव ऊर्जाओं का लाभ मानवता के उपयोग के लिये कर रहा होता ! किंतु ऐसा नहीं हुआ !
वास्तव में समानांतर ब्रह्मांड में जो देव ऊर्जायें निवास करती हैं, उन्हें किसी भी आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण से नहीं जाना जा सकता है ! यह कार्य बस सिर्फ मानव मस्तिष्क ही कर सकता है और उसके अंदर से निकलने वाली ऊर्जायें ही दूसरे समानांतर ब्रह्मांड के देव ऊर्जाओं से संवाद कर सकती हैं !
मात्र मानव मस्तिष्क को ही दूसरे ब्रह्मांड की देव उर्जाओं का दिशा निर्देश प्राप्त हो सकता है और यह भी जन्म जन्मांतर तक साधनाऐ करके मानव मस्तिष्क की ऊर्जाओं को विकसित करने के उपरांत ! जो ऊर्जायें जन्म जन्मांतर तक मनुष्य को सामान्य मनुष्य से अलग हटाकर महापुरुष या युगपुरुष बना देती हैं !
जो व्यक्ति इस पृथ्वी पर ऐसे अद्भुत कार्य करते हैं, जिसे सामान्य मनुष्य नहीं कर सकता है ! वह अद्भुत कार्य करने वाले मनुष्यों को ही सामान्य मनुष्य, महापुरुष या युगपुरुष कहते हैं ! जैसे राम, कृष्ण, गुरु नानक, गौतम बुद्ध, महावीर जैन, मोहम्मद साहब आदि आदि !
लेकिन पूर्व जन्मों के साधना के परिणाम स्वरूप प्राप्त कुछ सिग्नल अर्थात संकेत हमारे शरीर में विद्यमान होते हैं ! जिनका वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में पाया जाता है ! उन्हें यदि विकसित कर लिया जाये तो सामान्य मनुष्य भी असामान्य महापुरुष या युगपुरुष हो सकता है !
आज सनातन ज्ञान पीठ इसी विषय पर एक विस्तृत सेमिनार आयोजित कर रहा है ! जिसमें बड़े-बड़े विद्वान अपना-अपना विचार व्यक्त करेंगे ! कि किस तरह के संकेतों के आधार पर एक सामान्य मनुष्य अपने अंदर की दिव्य ऊर्जा को प्रकट करके सामान्य मनुष्य से महा मनुष्य अर्थात युगपुरुष बन सकता है !
यह कार्यक्रम आज शाम 05 जून 2021 को ऑनलाइन शाम 8:00 बजे से शुरू होगा ! जिसमें समाज का कोई भी जिज्ञासु व्यक्ति जुड़ सकता है और स्वयं अपने को या अपने आने वाली पीढ़ियों को इससे लाभान्वित कर सकता है !!
मीटिंग का लिंक नीचे दिया जा रहा है :-
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये
अपने बच्चों को महापुरुष कैसे बनायें !
यह कार्यक्रम आज शाम 05 जून 2021 को ऑनलाइन शाम 8:00 बजे से शुरू होगा ! जिसमें समाज का कोई भी जिज्ञासु व्यक्ति जुड़ सकता है और इससे लाभान्वित कर सकता है !
मीटिंग का लिंक नीचे दिया जा रहा है :-
