शैव-दर्शन का उद्घोष है कि “पशुत्वं त्यक्त्वा पतिर्भवेत्”। अर्थात पहले पशु-भाव छोड़ो, तब शिव-भाव आएगा। मतलाब जिसने संसार में मानवीय गुणों के साथ जीना नहीं सीखा, वह भगवान को भी नहीं पा सकता है। यह पलायन-विरोधी, संसार और जीवन को स्वीकारने का मार्ग है।
शिव ‘गृहस्थ-योगी’ हैं, वह पार्वती और गणों के संग, श्मशान तक की जिम्मेदारी लिये हुये हैं । उन्होंने संन्यास लेकर हिमालय की गुफा नहीं पकड़ी, बल्कि विवाह किया, परिवार चलाया, समाज को विष-पान करके बचाया।
संकेत स्पष्ट है कि यह संसार ‘प्रशिक्षण स्थल’ है। यहाँ जिम्मेदारी की परीक्षा पास किये बिना मोक्ष की डिग्री मिलना असंभव है।
शिव-महापुराण पूछता है – “अशुद्ध-चित्तस्य कुतो ब्रह्म-ज्ञानम्?” अर्थात मलिन चित्त वाले व्यक्ति के लिये कैसा ब्रह्म-ज्ञान ?
और चित्त शुद्ध होता है लोक कल्याण के व्यवहार से। लोक कल्याण के लिये सत्य बोलने वाला ही ‘शिव’ है। दयालु ही ‘करुणावतार’ शिव है। क्षमाशील ही उस शिव तक पहुँच सकता है, जिसने कामदेव को भी भस्म करके पुनः जीवन का सिधान्त दिया।
जो घर में क्रोध करता है, व्यापार में छल करता है, माता-पिता को वृद्धाश्रम भेजता है ! वह माला फेरकर भी शिव को नहीं रिझा पायेगा?
शिव कहते हैं “वत्स, पहले मनुष्य तो बनो” फिर मेरा अभिषेक करना।
मनोविज्ञान भी यही कहता है। जिसने क्रोध नहीं जीता, वह ध्यान में बैठ कर भी शत्रु का ही चेहरा देखता है, ईश्वर नहीं। जिसने लोभ को नहीं मारा, समाधि में भी बैंक-बैलेंस ही गिनेगा।
कुछ संप्रदाय सिखाते हैं कि “संसार मिथ्या है, छोड़ दो, नाम जपो, बैकुंठ मिलेगा”। यह पलायन है।
शिव कहते हैं कि “संसार मिथ्या नहीं, शिव-मय है। पत्नी में पार्वती, पुत्र में गणेश, पड़ोसी में नंदी देखो”। जो अपने झगड़े न सुलझा सके, वह कुंडलिनी क्या जगाएगा?
अतः शिव का सूत्र याद रखना “दिन में 23 घंटे का व्यवहार ही असली रुद्राभिषेक है, एक घंटा पूजा तो केवल प्रतीक”।
रात सोने से पहले स्वयं से पूछो – “आज किसी का दिल तो नहीं दुखाया?” यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो शिव आपके सिरहाने हैं। शिव-पुराण का आश्वासन है – “लोकेषु यः कृती सोऽहं, तस्याहं न हि दूरतः” अर्थात जो संसार में कुशल-कर्मी है, मैं उससे दूर नहीं हूँ।
इसलिए पहले ‘नर’ बनो फिर ‘नारायण’ को तलाशना, वह स्वयं दौड़े आएँगे। भागना नहीं, जागना सीखो। यही शैव-धर्म है। यही सही जीने की कला है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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