आज यह चिंतन का विषय है कि “आदिपुरुष” जैसे फिल्मों से किन लोगों का अस्तित्व खतरे में आ गया है !
इसका यदि वर्गीकरण किया जाये, तो सबसे पहला नाम उन वैष्णव भक्तों का आता है, जिन्होंने महर्षि वाल्मीकि की रामायण पढ़ी ही नहीं है !
दूसरा नंबर पर उन कथावाचकों का आता है, जो पीड़ियों से राम का गुणगान करके राम के नाम पर समाज को गुमराह करके अपना परिवार पाल रहे हैं !
तीसरा उन मठ मंदिरों को चलाने वालों को परेशानी है जो राम के नाम पर भक्तों की भावनाओं से खेल रहे हैं !
चौथा उन राजनीतिज्ञों को परेशानी है, जो राम का नाम लेकर सत्ता में बैठे रहने का ख्वाब देखते हैं !
पांचवा वह अकर्मण्य पुरुषार्थ विहीन व्यक्ति, जो यह मानता है कि भगवान ही उसकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं ! वह सदैव इस बात से भयभीत रहता है कि अगर भगवान नाराज हो गये तो उसके जीवन की कठिनाइयां और बढ़ जायेंगी !
अतः यह लोग भगवान के अस्तित्व और ईश्वरीय कार्य कारण की व्यवस्था को समझे बिना ही अनावश्यक रूप से भगवान से भयभीत बने रहते हैं !
छठां वह वर्ग जो किसी का सगा नहीं ! इसे विरोध में ही मजा आता है ! समाज में जिस तरफ की हवा बहती है, यह लोग उसी के साथ अपने निजी मौज मस्ती के लिए जुड़ जाते हैं !
कहने का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति “धर्म के मर्म” को सही अर्थ में समझता है, वह कभी भी इस तरह के विषयों का विरोध नहीं करेगा !
या फिर जो अपने जीवन निर्वाह के लिए घर परिवार रोजी-रोटी, नौकरी, मेहनत आदि में स्वयं व्यस्त है, उसे इस सब से कोई फर्क नहीं पड़ता है !
क्योंकि वह जानता है कि उसे रोटी भगवान नहीं, उसका पुरुषार्थ देगा ! वह अपने घर परिवार के विकास में निरंतर लगा हुआ है ! उसके पास तो इस तरह के विषयों पर विचार करने का भी समय नहीं है !
इस तरह “आदिपुरुष” का विरोध करने वाले या तो राम के नाम पर कमाने खाने वाले हैं या फिर वह अज्ञानी लोग हैं, जिन्होंने राम के कार्यों के पीछे उस समय की राजनैतिक कारणों को जाना ही नहीं है !
राम का अस्तित्व, तत्कालीन घटनाक्रम, तत्कालीन वैश्विक राजनीति क्रम, इतना विराट और बिखरा हुआ है कि इन “आदिपुरुष” का विरोध करने वाले लोगों के चिंतन में सम्पूर्ण विषय आ ही नहीं सकता है !
वैसे भी इस विवाद को आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए हिंदुओं को एक मंच पर इकट्ठा करने के लिए हथियार के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है अन्यथा केंद्र और राज्य में सत्ता में बैठे हुये तथाकथित राम भक्त शासक अपने एक दस्तक से इस पूरी फिल्म को पहले ही दिन प्रतिबंधित कर विवाद को ख़त्म सकते थे !
लेकिन राजनीतिक कारणों से वह लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं ! अतः आप भी इसे भावनात्मक ऐतिहासिक घटनाक्रम को न मानते हुये, बाल सुलभ राजनैतिक मनोरंजन के तौर पर देखिये !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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