तंत्र सभी पर समान रूप से कार्य करता है ! किंतु प्रायः देखा जाता है कि मध्यम और निम्न वर्ग के लोग तंत्र के प्रभाव में जल्दी आ जाते हैं ! जबकि अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग का व्यक्ति तंत्र के प्रभाव में जल्दी नहीं आता है ! इसका मूल क्या कारण है !
इसके तीन प्रमुख कारण हैं :
नंबर 1 संपन्न वर्ग के व्यक्ति की ग्रह स्थिति इतनी प्रबल होती है कि उन ग्रह शक्तियों के प्रभाव से वह व्यक्ति संपन्नता की पराकाष्ठा पर निरंतर बना रहता है और जब किसी भी व्यक्ति की ग्रह स्थितियां बहुत मजबूत होती है तो उस स्थिति में उस व्यक्ति के ऊपर तंत्र का प्रयोग किया जाना आसान नहीं होता है !
अतः संपन्न व्यक्ति बहुत कम तंत्र के प्रभाव में आते हैं लेकिन ग्रहों के संधि काल की अवस्था में या कुंडली में अल्प मारण या नुकसान का योग चल रहा है तो उस समय यदि संपन्न व्यक्ति पर तंत्र का प्रयोग किया जाता है तो वह संपन्न व्यक्ति भी तंत्र के प्रभाव में आ जाता है !
दूसरा कारण प्रायः सभी संपन्न व्यक्ति किसी न किसी गुरु के अधीन उसके संरक्षण में रहते हैं या अपने भले के लिए निरंतर कोई न कोई पूजा अनुष्ठान आदि किसी योग्य गुरु से करवाते रहते हैं ! जिस वजह से उन्हें प्रकृति का विशेष संरक्षण प्राप्त होता है और उस संरक्षण के कारण सामान्य तंत्र या कोई सामान्य तांत्रिक उनके ऊपर तंत्र प्रयोग नहीं कर पाता है !
नंबर 3 प्राय: महत्वपूर्ण पदों पर बैठा हुआ व्यक्ति किसी न किसी तंत्र की उर्जा के प्रभाव से उस स्थान पर बैठाया जाता है ! जहां पर सामान्य भौतिक तथा विधिक शक्तियों का केंद्र होता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये कि जैसे कोई सामान्य व्यक्ति प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनता है तो संवैधानिक शक्तियां उसके हाथ में आ जाती हैं और ऐसे संवैधानिक शक्तियों के प्रयोग करने वाले व्यक्ति के पीछे जो लोग उस व्यक्ति से अपने कार्य करवाते हैं ! वह अपने संसाधनों से उस व्यक्ति को तंत्र का संरक्षण प्रदान करते हैं !
उदाहरण के लिए सिकंदर जब विश्व विजय की यात्रा पर निकला था तब उसकी तांत्रिक मां ने उसे तंत्र से संरक्षण प्रदान किया था किंतु भारत पर आक्रमण करने के उपरांत यहां के तांत्रिकों ने उसके माँ के तंत्र के प्रभाव को नष्ट कर दिया था ! जिस वजह से सिकंदर की मृत्यु हो गई !
ऐसे ही इतिहास में और भी हजारों उदाहरण मिलेंगे कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति बहुत तेजी से ऊपर उठता है और जब उसका सामना किसी योग्य तांत्रिक से होता है तो उसके प्रभाव में वह सहयोग करने वाला तंत्र नष्ट हो जाता है और व्यक्ति के अंदर सभी योग्यता क्षमता प्रतिभा होते हुए भी वह व्यक्ति स्वत: समाप्त हो जाता है !
अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये कि संपन्न व्यक्ति भी तंत्र का लाभ उठाकर ही संपन्न होते हैं और जब तंत्र का सहयोग बंद हो जाता है तो संपन्न से संपन्न व्यक्ति भी नष्ट हो जाते हैं किंतु इन शक्तियों की जानकारी आम जनमानस को नहीं होती है इसलिए वह लोग यह मानते हैं कि संपन्न व्यक्ति के ऊपर तंत्र का प्रभाव नहीं होता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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