सामान्यतः व्यक्ति एक ढर्रे में जिंदगी जीता है और जब कोई सामाजिक व्यक्ति अपना जीवन जीता है तो उसके आसपास भी उसी के बौद्धिक स्तर और आर्थिक स्तर के लोग होते हैं !
और जब कुछ विशेष व्यक्ति देश, काल, परिस्थिती और अनुभव के आधार पर अपने को विकसित करने के लिये अपने जीने के तरीके को बदल लेते हैं, तब उनके आसपास के लोग जो होते हैं, वह अपने जीने के तरीके को नहीं बदलते बल्कि जिस ढर्रे में जिंदगी जीते चले आ रहे होते हैं, वैसे ही जीते रहते हैं !
उसका परिणाम यह होता है कि जिस व्यक्ति ने अपने को विकसित करने के लिए अपने जीने के तरीके को बदल लिया है और वह विकसित हो रहा है, उसे देख कर उसके आसपास के लोग उस विकसित होने वाले व्यक्ति का विरोध करने लगते हैं !
इसको दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि यदि आपके साथ चलने वाले आपके जीने के तरीके के बदले जाने के कारण आपका विरोध नहीं कर रहे हैं, इसका मतलब यह है कि आप प्रगति के मार्ग पर नहीं हैं, बल्कि सामान्य मनुष्य की तरह एक ढर्रे में ही अपनी जिंदगी को जी रहे हैं !
इसलिए विरोध से डरिए मत, अपने को विकसित कीजिए, जो समाज आज आपका विरोध कर रहा है, वही समाज कुछ समय बाद आपका अनुकरण करने लगेगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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