उच्च चेतना के किसी भी महान संकल्प से जुड़ी कोर टीम का निर्माण किसी सामान्य सांसारिक प्रक्रिया या औपचारिक साक्षात्कार से नहीं होता है।
वास्तव में, इस समूह का हिस्सा बनना सामान्य व्यक्तियों के लिए अत्यंत कठिन होता है, क्योंकि वह दल वर्तमान जीवन के संयोगों का नहीं, बल्कि जन्म-जन्मान्तर के सामूहिक प्रशिक्षण, तप और सूक्ष्म संस्कारों का परिणाम होता है।
इस समूह के सदस्य बाहरी निर्देशों से अधिक एक-दूसरे के आभामंडल और सूक्ष्म ऊर्जा की तरंगों के साथ लयबद्ध होकर कार्य करते हैं।
पूर्वजन्मों की साझा साधना के कारण उनके भीतर एक ऐसी अदृश्य वैचारिक और आत्मिक एकरूपता होती है, जहाँ बिना कहे ही संकल्पों का संप्रेषण हो जाता है।
वह अलग-अलग शरीर होते हुए भी एक ही केंद्रीय चेतना की विभिन्न शाखाओं की भांति कार्य करते हैं। उनका ऊर्जा-चक्र पूर्णतः निस्वार्थ सेवा और समर्पण की उच्च आवृत्ति पर गतिशील रहता है।
वह सभी अलग अलग शरीर में रहते हुये भी एक सामूहिक यंत्र की तरह कार्य करते हैं !
ऐसे उच्च और पवित्र ऊर्जा-क्षेत्र में जब कोई नया व्यक्ति, जिसका आभामंडल सांसारिक अहंकार, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और स्वार्थ की भारी तथा कलुषित ऊर्जा से भरा हो, वह प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो उस समूह के मध्य ऊर्जात्मक असंतुलन पैदा हो जाता है, जिससे टकराव उत्पन्न हो जाता है।
स्वार्थ और ‘मैं’ के दंभ से ग्रस्त व्यक्ति की ऊर्जा की आवृत्ति अत्यंत निम्न और भारी होती है। वह उच्च ऊर्जा के समूह की सूक्ष्म कार्यप्रणाली और नि:स्वार्थ प्रवाह के साथ कभी सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाता है।
जैसे एक ही सरगम पर बज रहे दिव्य वाद्ययंत्रों के बीच एक बेसुरा तार पूरे संगीत में विक्षेप पैदा कर देता है, या जैसे मानसरोवर के निर्मल जल में तेल की बूंद कभी घुल नहीं सकती, ठीक वैसे ही अहंकार से युक्त आभामंडल इस आध्यात्मिक समूह का हिस्सा नहीं बन पाता है। समूह की सामूहिक चेतना की शुद्धता स्वतः ही ऐसे असंगत तत्वों को अस्वीकार कर देती है।
इसलिए, जब तक व्यक्ति अपने पुराने अहंकार और स्वार्थ के आवरण को गलाकर अपनी ऊर्जा को उस उच्च स्तर पर रूपांतरित नहीं कर लेता, तब तक इस दिव्य और प्रशिक्षित समूह में उसका टिक पाना असंभव ही रहता है।
इसलिये उच्च चेतना के व्यक्ति की टीम में जुड़ना कठिन होता है क्योंकि वह टीम जन्म जन्मान्तर के सामूहिक प्रशिक्षण से निर्मित होती है ! सभी एक दूसरे के ओर की ऊर्जा के साथ कई जन्मों में काम कर चुके होते हैं, उसमें अहंकार और स्वार्थ से भरे हुये नये ओरे के व्यक्ति का जुड़ना और समायोजित करना संभव नहीं होता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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