कामसूत्र मात्र काम ग्रन्थ नहीं : Yogesh Mishra

प्राय: कामसूत्र का नाम सुनते ही व्यक्ति घृणा और हीनता के भाव से भर जाता है, जबकि कि काम ही इस मैथुनिक सृष्टि का आधार है !

काम को विकृत, घृणा और हीनता के भाव से देखने की शुरुआत वैष्णव आक्रान्ताओं ने अपनी सेना के निर्माण के लिये युवाओं को सेना में शामिल करने के लिये की थी ! जिस वजह से काम को लेकर नकारात्मक विचार का प्रभाव वैष्णव शासन काल में भारत में कई हजार वर्षों तक चला !

भारत मगध (बिहार) के एक प्राचीन दार्शनिक जो कि चाणक्य (कौटल्य) के प्रधान शिष्य थे ! कामन्दक ने काम शास्त्र पर आयुर्वेद से अलग एक स्वतन्त्र ग्रन्थ “कामसूत्र” लिखा ! जिन्हें बाद में महर्षि वात्स्यायन कहा गया !

इस ग्रन्थ के पूर्व “काम कला सूत्र” आयुर्वेद शिक्षा का एक अंग था ! जो यौन विकृति के उपचार के तौर पर पढाया जाता था !

महर्षि वात्स्यायन ने कामसूत्र में न केवल दाम्पत्य जीवन के रसिक श्रृंगार कला का वर्णन किया है, वरन वास्तुकला, शिल्पकला एवं ऋतु विज्ञान को भी संपदित किया है !

कामसूत्र महर्षि वात्स्यायन द्वारा रचित विश्व का प्रथम और प्राचीन कामशास्त्र सेक्सोलोजी  ग्रन्थ है ! यह कहिये की यह विश्व की प्रथम यौन संहिता है !

जिसमें यौन कला, प्रेम, मानव के मनोशारीरिक सिद्धान्तों का विस्तार से वर्णन है तथा मानव जीवन में काम कला के प्रयोग की विस्तृत व्याख्या एवं विवेचना की गई है ! मनुष्य आज विज्ञान के विकसित होने के बाद भी इस तरह का “काम विज्ञान” पर प्रमाणिक ग्रन्थ आज तक विकसित नहीं कर पाये हैं !

इस ग्रन्थ के इसी विशेषता को देखते हुये इसे वर्ष 1883 में अंग्रेजों ने जर्मन विद्वानों के सहयोग से इस ग्रन्थ का संस्कृत से अंग्रेजी भाषा में अनुवाद प्रसिद्ध भाषाविद सर रिचर्ड एफ़ बर्टन ने करवाया था !

तब दुनियां को पता चला की कि कामसूत्र मात्र काम ग्रन्थ नहीं बल्कि यह अच्छी तरह से जीने की कला भी सिखलाता है ! यह  प्रेम की प्रकृति, एक आदर्श जीवन साथी की खोज, प्रेम का जीवन में महत्व एवं प्रेम को बनाये रखने की कला जैसे अन्य पहलु जिससे मानव जीवन आनन्द-उन्मुख हो सके वह सब कुछ इस ग्रन्थ में मौजूद है !

काम ऊर्जा से तंत्र के क्षेत्र में भी इस ग्रन्थ के अध्ययन से अपना विकास किया जा सकता है ! मेरी दृष्टि में यह जीवन में अवश्य अध्ययन करने योग्य एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है ! जिसका अध्ययन मात्र सभी सामान्य जनों को ही नहीं बल्कि त्यागी, संन्यासी, साधक, कूटनीतिज्ञ, समाज शास्त्री, अर्थशास्त्री आदि सभी को करना चाहिये !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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