क्या धर्म गुरुओं ने ही सनातन हिन्दू समाज को तोड़ा है  : Yogesh Mishra

वैसे कहने को तो हम सभी राजा सूर्य, विवस्वान्, चंद्र, ऋषि, मुनि, मनु और कश्यप ऋषि आदि की संतानें हैं ! पर इतिहास साक्षी है हम हमेशा से मात्र अपने साम्राज्य विस्तार के लिये अपनों से ही लड़ते आये हैं !

इसी क्रम में महाभारत युद्ध में जब सभी प्रभावशाली राजाओं की हत्या हो गई और धर्म को आश्रय देने वाले शासक नहीं बचे ! तब समाज से धीरे-धीरे धर्म विलुप्त होने लगा !

जो योग्य साधक और समाज के मार्गदर्शक थे, वह भी समाज में बढ़ती हुई अराजकता और अपने अपमान से दुखी होकर समाज को उसके हाल पर छोड़कर हिमालय की ओर चले गये !

विकृत समाज में तेजी से वर्णसंकरता बढ़ने लगी ! व्यक्ति अपने आचार विचार से दूषित हो गया ! वर्ण व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई और सनातन जीवन शैली की सभी मर्यादाएं धीरे-धीरे विलुप्त हो गयी !

तब कालांतर में धीरे-धीरे नये-नये धर्म समूहों की उत्पत्ति होना शुरू हो गई ! बौद्ध, जैन, यहूदी, ईसाई, इस्लाम आदि के नाम से पूरी दुनिया में सैकड़ों की तादाद पर धर्म समूह पैदा हुये ! जिसमें कुछ ही अपने अस्तित्व को स्थापित कर पाये वरना अधिकांशत तो योग्य धर्मगुरु के अभाव में बहुत ही कम समय में विलुप्त हो गये !

इसमें से कुछ लोगों तलवारों को हाथ में लेकर पूरी दुनिया में अपने धर्म समूह को मजबूत करने के लिये धर्मांतरण करवाये, तो कुछ लोग समाज को बहला-फुसलाकर बौद्धिक युद्ध के द्वारा धर्मांतरण में लग गये !

पर सभी का उद्देश्य एक ही था कि हमारे धर्म समूह में अधिक से अधिक लोग शामिल हैं ! जिससे हम आर्थिक और सामाजिक रूप से निरंतर मजबूत होते चले जायें !

 इन सब के पीछे धर्म संस्थापकों के उत्तराधिकारियों का लालच, हराम का पैसा और अय्याशी की जिंदगी जीने की मंशा शामिल थी ! इन धर्म समूहों के संचालकों को मनुष्य या मानवता से कोई लेना-देना नहीं था !

यह अपने यश, भोग और धन के लिये पागलों की तरह सनातन जीवन शैली जीने वालों पर विस्तृत धर्मांतरण अभियान के तहत रोज ही नये-नये स्वरूप में आक्रमण कर रहे थे ! जैसे एक अबोध बच्चे पर खूंखार भेड़िये कूद पड़ते हैं और उसकी बोटी-बोटी नोच कर खाना शुरु कर देते हैं !

यह क्रम आज भी जारी है और इस आधुनिक युग के तथाकथित संप्रदायों का प्रचलन पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक हो रहा है ! जैसे ब्रह्म समाज, रामकृष्ण मिशन, आर्य समाज, बाबा जयगुरुदेव समाज, ब्रह्मा कुमारी, राधास्वामी मत, डेरा सच्चा सौदा, संत रामपाल का मत आदि ऐसे-ऐसे भारत में न जाने कितने ही मत प्रचलित हैं ! जिन्होंने सनातन जीवन शैली से सहज जीवन जीने वालों को अपने अपने तरीके से धर्म की व्याख्या कर धर्म का सत्यानाश कर दिया है !

इसके अलावा भारत में ऐसे बहुत से संत हुये हैं, जिन्होंने अपना एक अलग संप्रदाय चलाया और अपने तरीके से एक नये ही धर्म को गढ़ने का प्रयास किया, लेकिन वह संसाधनों के अभाव में समाज को प्रभावित नहीं कर पाये और महज एक संप्रदाय में ही सिमटकर रह गये ! ऐसे सैकड़ों संप्रदाय आज भी हमारे समाज में विद्यमान हैं ! जिनके कारण सनातन धर्मीं हिन्दू समाज आपस में बंटा हुआ है ! साथ ही इन सम्प्रदायों के कारण हिन्दुओं में एक भ्रम और टकराव की स्थिति निरंतर बनी हुयी है !

इसी तरह प्रारंभ में गुप्त और मध्यकाल में संत संप्रदायों का विकास बहुत तेजी से हुआ था ! इस काल में वैष्णव सम्प्रदाय वादियों ने समाज को खूब गुमराह किया ! वल्लभ, रामानंद, माधव, बैरागी, दास, निम्बार्क, गौड़ीय, श्री संप्रदाय, उदासीन, निर्मली, दसनामी, नाथ, दादू, लालदासी, चरणदासी, रामस्नेही, निरंजनी, रामनंदी, सखी, वारकरी, नामदेव, चैतन्य महाप्रभु, स्वामी प्रभुपाद, आदि-आदि ण जाने कितने संप्रदायों की रचना हुई !

उसी तरह सूफी संप्रदाय में भी चिश्ती सम्प्रदाय, कादरी सम्प्रदाय, सुहरावर्दी सम्प्रदाय, नक्शबंदिया सम्प्रदाय का जन्म हुआ ! बड़ी संख्या में कई गैर-मुस्लिमों ने भी इस मत में खुद को दीक्षित किया और इन्हें बढ़ाने का कार्य किया !

इसके अलावा गुजरात में 1539 आसपास एक नये समाज की रचना हुई ! जिसे बोहरा मुस्लिम समाज कहा जाने लगा ! इसके दो भाग हैं ! एक दाऊदी बोहरा और दूसरा सुलेमानी बोहरा ! इनमें भारतीयों की संख्या ही अधिक है, जिसमें गुजरात के व्यापारी और किसान समाज अपने लाभ के लिये खूब शामिल हुये ! वैसे भारत में दाऊदी बोहरा संप्रदाय के लोग अधिक हैं !

इसके अलावा 1844 में अस्तित्व में आया बहाई धर्म भी आज कल भारत में खूब सक्रिय है ! बहाई पंथ की शुरुआत ईरान में हुई थी ! यह भी एकेश्वरवादी धर्म है ! इसकी स्थापना बहाउल्लाह ने की थी और इसके मतों के मुताबिक दुनिया के सभी मानव धर्मों का एक ही मूल है ! “बहाउल्लाह” को (1817-1892) बहाई धर्म के ईश्वरीय अवतार हैं !

इसके अलावा “अहमदिया” संप्रदाय के भी लाखों लोग भारत और पाकिस्तान में पाये जाते हैं ! मुस्लिम सुन्नी समाज के लोग इनको मुसलमान नहीं मानते हैं ! सुन्नी तो शियाओं को भी मुसलमान नहीं मानते ! हालांकि इसके कुछ अपने-अपने धार्मिक और ऐतिहासिक कारण हैं !

इन सभी समस्याओं का मूल कारण यह है कि भारत एक ऐसा विशाल देश है ! यहां की आबादी बहुत अधिक है और समाज को नियंत्रित करने के लिये न तो यहाँ धर्म गुरुओं का ही प्रभाव है और न ही शासन सत्ता का !

भारत में लगभग 15 प्रमुख भाषाएं हैं और 844 बोलियां हैं ! आर्यों की संस्‍कृत भाषा के पूर्व द्रविड़ भाषा में विलय से भारत में कई नई भाषाओं की उत्‍पत्‍ति हुई ! हिन्दी भारत की संपर्क भाषा है और हम सब भारतीय हैं !

पर जो कभी क्षेत्रीय भाषायें हुआ करती थी ! गुजराती, मराठी, पंजाबी, तमिल या बंगाली आदि वह सभी संविधान के निर्माण के बाद संवैधानिक भाषा हो गयी हैं ! जिससे समाज में भाषा के आधार पर क्षेत्रवाद भी बढ़ा है और भारतीय अब एक न रह कर क्षेत्र और भाषा के आधार पर टूट चुका है !

उसी का परिणाम है कि विश्व के हर धर्म को मानने वाले लोगों के लिये भारत सदैव से धर्मांतरण करवाने के लिये आकर्षण का केंद्र बना हुआ है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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