आध्यात्मिक सुरक्षा कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि यह सनातन ज्ञान और जीव-विज्ञान का सर्वोच्च शिखर है। एक सच्चा गुरु केवल उपदेशक नहीं होता; वह एक ‘कॉस्मिक फिजिशियन’ (ब्रह्मांडीय चिकित्सक) होता है, जो अपने प्राणों की आहुति देकर शिष्य के अंतःस्रावी तंत्र का कायाकल्प कर देता है।
यह मानव शरीर केवल माँस, मज्जा और हड्डियों का ढाँचा नहीं है; यह चेतना की सिद्धि का एक अत्यंत सूक्ष्म और जटिल जीव-वैज्ञानिक यंत्र है। सनातन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान, दोनों यह मानते हैं कि हमारे विचार, हमारी ऊर्जा और हमारे आस-पास का वातावरण हमारे शरीर के भीतर गहरे रासायनिक बदलाव लाते हैं।
जब हम ‘तांत्रिक हमले’ या नकारात्मक ऊर्जा और उससे ‘गुरु द्वारा रक्षा’ की बात करते हैं, तो यह केवल कोई रहस्यमयी घटना नहीं है। यह सीधे तौर पर हमारी प्राणिक ऊर्जा और हमारे अंतःस्रावी तंत्र के बीच चल रहा एक महायुद्ध होता है।
तब गुरु की कृपा से जीव-विज्ञान की ग्रंथियां और आध्यात्म के चक्र जब एक व्यवस्थित लय में धड़कने लगते हैं, तभी जीव को यथार्थ ‘चेतना की सिद्धि’ प्राप्त होती है। नकारात्मक शक्तियां हमारे शरीर से दूर होने लगती हैं और गुरु अपनी यौगिक शक्ति से हमारे ही शरीर के दिव्य रसायनों को सक्रीय करके हमें दिव्य जीवन प्रदान करता है।
इस तरह गुरु मात्र हमें सिद्धि प्रदान करने में सहायक ही नहीं है, बल्कि गुरु हमारी तमस उर्जाओं से रक्षा भी करता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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