चिंतन विहीन धर्म गुरु की तलाश : Yogesh Mishra

 आज ही नहीं अनादि काल से मनुष्य बहुत अधिक चिंतन के पक्ष में नहीं रहा है ! कुछ महत्वपूर्ण संवेदनशील व्यक्तियों ने जो चिंतन किया, उसी से सनातन धर्म ग्रंथों का निर्माण हुआ है !

 मानव समाज सदैव से चिंतन से कतराता रहा है और यह परंपरा आज भी चली आ रही है ! इसी का परिणाम है कि आज चिंतनशील व्यक्ति को समाज अस्वीकार कर देता है और ढोलक मजीरा पीटने और पिटवाने वाले गुरु को समाज पसंद करता है !

 क्योंकि व्यक्ति न तो धर्म के नाम पर गंभीर ऐतिहासिक घटनाओं का चिंतन करना चाहता है और न ही आत्म कल्याण के लिए ही वह “स्व” पर गंभीर चिंतन करना चाहता है !

आज मनुष्य मात्र धर्म और अध्यात्म की ओट में समाज से मान्यता प्राप्त मनोरंजन करना चाहता है !

 इसी अवसर का लाभ उठाकर समाज का चालाक तथाकथित धर्म गुरु व्यक्ति को भगवान के नाम पर मनगढ़ंत, कपोल कल्पित, अवैज्ञानिक कथा कहानियां सुना कर, उनसे अपना पोषण कर रहे हैं !

 यही सनातन हिंदू धर्म के विनाश और पतन का कारण है !

 आज के धर्मगुरु चाहे हिंदू धर्म का सर्वनाश हो जाए या हिंदू राष्ट्र का किन्तु उनके आश्रम का विकास निरंतर होते रहना चाहिए ! इस पर सबसे ज्यादा उनका ध्यान रहता है !

 इसी वजह से आज के धर्मगुरु नए-नए टूर पैकेज और भक्तों के पैसे पर आधुनिक सुविधाओं का आनंद लेने के लिए दूरस्थ स्थानों पर धर्म कथा कम मनोरंजन कथा अधिक आयोजित करने के लिये उत्सव दिखाई देते हैं !

और भक्त भी ऐसे हैं कि धर्म कथा के नाम पर पूर्ण मनोरंजन प्राप्ति के लिए मौका मिलने पर शराब पीने से लेकर वेश्यावृत्ति तक के किसी भी अवसर को नहीं छोड़ना चाहते हैं !

 इसीलिए ऐसे भक्त इस तरह की दूरस्थ धर्म कथाओं में अपने परिवार या पत्नी को साथ ले जाने से कतराता है ! क्योंकि वह जानते हैं कि उसके साथ जाने से उसकी स्वतंत्रता बाधित होगी !

और तथाकथित धर्मगुरु भी मौके का लाभ उठाकर भगवा कपड़े में ही मनोरंजन का पूरा आनंद लेते हैं ! कोई गांजा पी रहा है,  तो कोई ……….. !

 जिन धर्म कथाओं में महिलाएं जाती हैं, तो उनका भी पूरा ध्यान धर्म कथा से शिक्षा प्राप्त करने के स्थान पर अपने पहनावे और जेवर के प्रदर्शन पर अधिक लगा रहता है !

 उनके लिए धर्म कथा एक फैशन शो से अधिक और कुछ नहीं होती है !

 ऐसी स्थिति में ऐसे अवसरवादी मनोरंजन पसंद धर्मगुरु और उन्हीं के इसी प्रवृत्ति के भक्त किस तरह के धर्म का विस्तार करना चाहते हैं यह आज बहुत बड़े चिंतन का विषय है !

 जिस पर समाज को विचार करना चाहिए अन्यथा आने वाले युग में परस्त्री गमन, परपुरुष गमन, नशा आदि धर्म का अनिवार्य हिस्सा घोषित कर दिया जाएगा !

 जैसे कि आज भगवान शिव के नाम पर नशा करना छम्य अपराध घोषित है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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