भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद् भगवद गीता के अध्याय 8, श्लोक 6 में अर्जुन को समझाते हुये कहा है कि “हे कौन्तेय ! मनुष्य जिस भी भाव का स्मरण करते हुए शरीर त्यागता है, वह अगले जन्म में उसी भाव के अनुरूप जन्म और परिवेश प्राप्त करता है।”
अर्थात मृत्यु के समय व्यक्ति जिस विचार पर ध्यान केंद्रित करता है, वह विचार ही उसके अगले जन्म का आधार होता है !
इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने जीवन में अच्छे कर्म करें, मोह और वासना से बचें, और मृत्यु के समय भगवान शिव का स्मरण करें ताकि हमें अगले जन्म में एक बेहतर जीवन प्राप्त कर सकें !
इसलिए यदि आप अगले जन्म में भी सफलता के साथ जीवन जीना चाहते हैं और एक संपन्न परिवार में जन्म लेना चाहते हैं, तो इस जन्म में संपन्नता से जीने का अभ्यास करना पड़ेगा और अपने हर कार्य को पूर्ण समर्पण के साथ व्यवस्थित तरीके से करके सफल होने का प्रयास करना पड़ेगा !
तभी आप अगले जन्म में संपन्न और सफल हो सकते हैं !
यही जन्मजात सम्पन्नता और सफलता का एक मात्र रहस्य है !
इसी को शास्त्रों में भी कहा गया है कि “अंत मति सो गति” !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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