तीसरे नेत्र का भोजन ध्यान है : Yogesh Mishra

तंत्र के प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि ध्यान ही तीसरी आँख का भोजन है ! यह तीसरा नेत्र  ध्यान के आभाव में जन्‍मों-जन्‍मों से भूखा है ! यही हमारे जीवनी ऊर्जा के पतन का कारण है !

यदि तुम उस पर ध्यान लगा कर उसकी भूख मिटाओगे तो वह तुम्हें अद्भुत जीवंत ऊर्जा देगा ! तुम्हारे नित्य ध्यान करने से उसे भोजन मिलेगा और इसी से ईश्वर द्वारा प्रदत्त तृतीय नेत्र को आनंद की प्राप्ति होती है !

एक बार यदि तुम इस दिव्य कला को जान जायें ! तो आनन्द तुम्हारी ओर स्वत: ही चुम्‍बकीय ढंग से आकर्षित होता रहेगा ! वैसे भी ध्यान को साधना कोई कठिन बात नहीं है ! व्‍यक्‍ति को बस ठीक बिंदु तक पहुँचने का अभ्यास करना होता है !

बस अपनी आंखें बंद करों, दोनों आँखो भ्रूमध्‍य में दिव्य बिंदु को अनुभव करो ! जब तुम उस बिंदु में स्थिर हो जाओ ! उस समय तुम्‍हारी वाह्य आँख जड़ हो जायेंगी ! तब उन्‍हें हिलाना भी कठिन हो जायेगा ! जब ऐसा हो जाये तो जानना कि तुमने ठीक बिंदु को पकड़ लिया है !

इस तरह अपने ध्यान को दोनों भौंहों के मध्‍य में लाओ और मन को ईश्वर के समक्ष आने दो ! यदि यह ध्यान लग जाये तो पहली ही बार तुम्‍हें एक अद्भुत अनुभव होने लगेंगे !

तब पहली बार में ही तुम दिव्य ऊर्जा को अपने समक्ष दौड़ता हुआ अनुभव करोगे ! तुम साक्षी हो जाओगे ईश्वरीय सत्ता के ! यह सब तुम्हारे अंत: पटल में एक फिल्म की तरह चलेगा ! तुम्हारे सामने तुम्हारे विचार दौड़ रहे होंगे और तुम एक साक्षी भाव से उन्हें घटता देख रहे होगे !

सामान्‍यतया हम विचार के प्रति साक्षी नहीं हो पाते हैं ! हम विचारों के साथ एकात्‍म हो जाते हैं ! यदि क्रोध आता है तो हम भी उसी क्रोध में रम जाते हैं ! कोई विचार उठता है तो हम तटस्त होकर उसके साक्षी नहीं हो पाते हैं !

यही से हमारा वैचारिक पतन शुरू होता है और यह पतन धीरे-धीरे यथार्थ रूप में परिवर्तित होकर हमारे सर्वनाश का कारण बन जाता है !

किंतु इसके विपरीत यदि तृतीय नेत्र पर तुम ध्यान लगाना शुरू करते हो तो धीरे-धीरे हमारा तृतीय नेत्र सक्रिय होकर हमारे अंदर त्रिकाल दर्शन की क्षमता पैदा कर देता है !

 इससे हमारे व्यक्तित्व में भी अद्भुत परिवर्तन हो जाता है और हम इस संसार में क्रमश: सफल होते चले जाते हैं !

इसलिए तीसरे नेत्र के भोजन अर्थात ध्यान को अवश्य करना चाहिए ! जिससे हमारा तीसरा नेत्र पुष्ट होकर हमें संसार में सफल बनाएं तथा मृत्यु के उपरांत हमें मुक्ति के मार्ग पर भी हमारा मार्गदर्शन करे !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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