धन का लक्ष्मी से कोई संबंध नहीं है : Yogesh Mishra

 आज दुनिया के किसी भी संपन्न देश में कोई भी संपन्न व्यक्ति हिंदुओं को छोड़कर लक्ष्मी की पूजा नहीं करता है ! फिर भी पूरी दुनिया की संपन्नता का 80% पैसा ऐसे लोगों के पास है, जिन्होंने कभी भी लक्ष्मी की आराधना नहीं की और लक्ष्मी की आराधना करने वाले हिन्दू इन्हीं खरबपतियों के यहाँ दो वक्त की रोटी के लिये नौकरी कर रहे हैं !

 हिंदू भी लक्ष्मी की आराधना प्राप्त सूचना के आधार पर मात्र संस्कारवश ही करता है ! जबकि वह जानता है कि धन का लक्ष्मी से कोई सम्बन्ध नहीं है ! धन युक्ति और ज्ञान से प्राप्त होता है न कि किसी आराधना या पूजा से ! किंतु वैष्णव कथावाचकों के प्रभाव में या प्राय: परिवार के दबाव में हिन्दू व्यक्ति लक्ष्मी की पूजा अनावश्यक  रूप से मात्र औपचारिकता के रूप में ही किया करता है !

 लक्ष्मी का संक्षिप्त परिचय मात्र इतना ही है कि वह भारत के दक्षिण तट के राजा समुद्र की बेटी थी ! जिनका व्यवसाय समुद्र के माध्यम से बहुत दूर-दूर तक फैला था और लक्ष्मी के पिता स्वयं लक्ष्मी के जन्म से पूर्व ही कई पीढ़ियों से अपने व्यापार व्यवसाय के कारण अति संपन्नता थी और वह राजा होने के साथ ही एक संपन्न व्यवसायी के रूप में भी जाने जाते थे !

क्योंकि उनका मुख्य कार्य पानी के जहाज से व्यापारियों के सामान को पूरे विश्व में भेजना और मंगवाना था ! जिसे आज की भाषा में “शिपिंग ट्रांसपोर्ट कंपनी” या इम्पोर्ट एक्सपोर्ट बिजनिस कहा जा सकता है ! जिस वजह से राजा समुद्र अति संपन्न हुआ करते थे !

यही राजा समुद्र रावण के परम मित्र थे जिन्होंने अकेले राम को सेना सहित समुद्र तट पर रोक रखा था ! तीन दिन की वार्ता के बाद भी जब राजा समुद्र नहीं माने तब लक्ष्मण ने राजा समुद्र के साम्राज्य को परमाणु बमों के हमले से नष्ट करने की धमकी दी तब व्यवसायी राजा समुद्र रास्ता देने के लिये मान गये !

 लक्ष्मी के पिता समुद्र अपने व्यापार को जल क्षेत्र की तरह ही स्थल क्षेत्र में भी विकसित करना चाहते थे तथा दूसरी तरफ विष्णु भी अपने अनुयायियों की गरीबी ख़त्म करने के लिये राजा समुद्र जैसे संपन्न शासक के यहाँ सम्बन्ध स्थापित करना चाह रहे थे ! इस हेतु उन्होंने राजा समुद्र बेटी लक्ष्मी से विवाह कर लिया और राजा समुद्र ने भू क्षेत्र के स्वामी विष्णु को अपनी बेटी विवाह करके दे दी !

लक्ष्मी अति संपन्न परिवार की अति समझदार कन्या थी और संयोग से उसका विवाह भी भू क्षेत्र के राजा विष्णु से हो गया था ! अतः विष्णु के साम्राज्य विस्तार में लक्ष्मी ने पूरी तरह से अपनी प्रतिभा का योगदान किया !

 जिससे विष्णु का प्रभाव पूरे विश्व में और तेजी से बढ़ने लगा और विष्णु लोक जो कैस्पियन सागर के पास का क्षेत्र था ! जहां पर कृषि आदि न होने के कारण अत्यंत गरीबी थी ! वहां पर लक्ष्मी के व्यवसायिक नीतियों के कारण धीरे धीरे संपन्नता बढ़ने लगी और वह क्षेत्र भी अन्य क्षेत्रों की तरह संपन्न होने लगा ! जिस वजह से विष्णु अनुयायी लोग जो कि कैस्पियन सागर के आसपास के थे तथा अति कष्ट पूर्ण वैष्णव जीवन शैली को जीते थे ! वह लोग भी इस सम्पन्नता के पूरा का पूरा श्रेय विकास की देवी समुद्र की पुत्री लक्ष्मी को देने लगे !

 इस तरह यहीं से लक्ष्मी को संपन्नता की देवी के रूप में जाना जाने लगा और इस तरह वैष्णव को भुखमरी से निकालकर संपन्नता की ओर लाने का जो मार्ग समुद्र की पुत्री लक्ष्मी ने दिखलाया उससे लक्ष्मी विष्णु अनुयायियों के समाज में संपन्नता के देवी के रूप में विख्यात हुई !

कालांतर में संपन्न होने के बाद अपने साम्राज्य के विस्तार के लिये विष्णु अनुयायियों ने जब पूरी दुनिया पर लाशों का ढेर लगा कर लोगों को वैष्णव जीवनशैली अपनाने के लिए बाध्य किया तो पूरे विश्व को अपनी संपन्नता के लिए लक्ष्मी की आराधना करने के लिए बाध्य करने लगे ! जैसे आज इसाई या मुस्लमान कर रहे हैं ! इसी परंपरा को आज भी हम ढ़ोते चले आ रहे हैं !

 किंतु याद रखिये मात्र लक्ष्मी की पूजा से कभी संपन्नता नहीं आती है ! इसके लिए युक्ति पूर्ण कार्य और योजनाबद्ध व्यवस्थित प्रयास भी करना पड़ता है ! मात्र लक्ष्मी के मंत्र जपने से या लक्ष्मी की चित्र और मूर्ति के आगे दीया जलाने से कभी कोई भी व्यक्ति पूरी दुनिया में कहीं भी संपन्न नहीं हुआ है इसलिए वैष्णव भ्रम से निकल कर आपको युक्ति पूर्ण तरीके से जीवकोपार्जन के लिये व्यवस्थित कार्य भी करना होगा !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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