नाभि स्थल को शरीर का दसवां गुप्त द्वार : Yogesh Mishra

इस सृष्टि में परमात्मा ने मनुष्य को एक अद्भुत प्राकृतिक खजाना दिया है ! जिसे मणिपुर चक्र कहते हैं अर्थात नाभि स्थल !

इस नाभि स्थल की उत्पत्ति से ही गर्भ काल शुरू होता है ! अर्थात इस शरीर रूपी पिण्ड के निर्माण की सर्वप्रथम अवस्था !

यह नाभि स्थल माता के साथ जुड़ कर माँ के गर्भ में हमारा पोषण करती है ! यही व्यक्ति के जीवनी शक्ति का स्रोत होता है इसलिए मृत्यु के तीन घंटे बाद तक मस्तिष्क के शान्त होने के बाद भी नाभी गर्म बनी रहती है !

जीव के गर्भधारण काल के दौरान नौ महीने अर्थात 270 दिन बाद इसी नाभी द्वारा पोषण के कारण जीव का सम्पूर्ण बाल स्वरूप विकसित होता है ! क्योंकि गर्भ में नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव माँ के शरीर से होता है ! इसलिए नाभी द्वार शरीर का एक अद्भुत द्वार है !

अब इसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करने लगा है ! हमारे यहां तो आयुर्वेद में अनादि काल से ही नाभि को जीवनी शक्ति का गुप्त द्वारा माना जाता रहा है !

 रावण ने अपनी साधना और ज्ञान के द्वारा वनस्पतियों से जो दिव्य जीवनी ऊर्जा का संग्रहित कर लिया था ! उस को नियमित रूप से अपने नाभि स्थल पर स्थापित करके उसने अपने आप को अजर अमर कर लिया था !

 इसीलिए राम रावण युद्ध के दौरान जब भी रावण को राम के आयुधों से क्षति होती थी ! तो वह घाव तत्काल भर जाते थे !

इसीलिए इंद्र के सारथी मिताली के सूचना देने पर रावण को मारने के लिये राम को रावण के नाभि स्थल पर अग्नेय अस्त्र चलाना पड़ा ! जिससे रावण की नाभि में स्थित अमृत सूख गया और रावण की मृत्यु हो गई !

होता यह है कि नाभी के पीछे की ओर एक नाभि बटन होता है ! जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पेचूटी ग्रंथी कहते हैं !

जिसमें शरीर की 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां आकर मिलती हैं ! जो सारे शरीर को नाभी से जोड़े रखता है ! इन रक्त धमनियों की लम्बाई एक लाख किलोमीटर तक हो सकती है ! जो कि पृथ्वी के गोलाई पर दो बार लपेट सकती है !

इसलिये आयुर्वेद के अनुसार यदि शरीर के नाभी स्थल पर शरीर में उत्पन्न किसी भी रोग के लिये कोई भी चिकना पदार्थ या रस लगाया जाता है ! तो वह पूरे शरीर में स्वत: ही प्रवाहित होकर शरीर को रोग मुक्त करने लगता है !  जिसको मैंने भी अपने अनुभव में सही पाया है !

जैसे नाभी में चन्द्र पध्यति से निकला गया गाय का शुध्द घी लगाने से शरीर की दुर्बलता ठीक हो जाती है !

आँखों की नसों के शुष्क हो जाने पर या नजर कमजोर हो जाने पर, त्वचा और बालों में चमक ख़त्म हो जाने पर सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और शुद्ध नारियल का तेल नाभी में डालें तो इस समस्या से निदान पाया जा सकता है !

इसी तरह घुटने के दर्द के लिये सोने से पहले तीन से सात बूंद इरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आस पास डेढ ईंच में फैला देवें, तो इससे भी घुटने का दर्द सही होने लगता है !

शरीर में कम्पन्न रोग या जोड़ोँ में दर्द या फिर शुष्क त्वचा के लिए उपाय रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई अर्थात सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसको नाभी के चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें ! तो उक्त सभी रोग ठीक हो जाते हैं !

मुँह और गाल पर होने वाले मुहासा या पिम्पल निकलने पर नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में डालें तो रक्त शुद्ध होने लगता है !

असल में होता यह है कि हमारे शरीर को स्वत: हो यह मालूम होता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी नस सूख रही है ! इसलिए वह उसी नस में स्वत: ही नाभी में दिये गये तेल को प्रवाहित कर हमें स्वस्थ्य कर देती है !

आज के आधुनिक विज्ञान में असाध्य रोगों की चिकित्सा के लिए नाभि स्थल के नाल को जन्म के समय से ही सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाने लगी है !

 आवश्यकता पड़ने पर वह नाल को जो हमारे शरीर को मां के गर्भ से जोड़े रखता है ! उसके अंदर से रसायन को निकाल कर व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करवा कर चिकित्सा की जा रही है !

इसलिए नाभि स्थल को शरीर का दसवां गुप्त द्वार मानते हुये उसकी हर संभव तरीके से सेवा और रक्षा करनी चाहिए !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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