पूतना वध का भ्रम : Yogesh Mishra

भगवान श्री कृष्ण की छठी पर विशेष लेख

 आज भगवान श्री कृष्ण की छठी है ! वैष्णव पुराणों के अनुसार आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण ने पूतना का वध किया था ! पर प्रश्न यह है कि यह पूतना थी कौन ? और भगवान श्री कृष्ण को इस पूतना का वध क्यों करना पड़ा ? क्या वास्तव में मात्र 6 दिन के भगवान श्री कृष्ण ने पूतना का वध किया था ?

 इसके लिए वैष्णव लेखकों द्वारा लिखे गये धर्म ग्रंथों के अतिरिक्त कुछ अन्य ऐतिहासिक विषयों पर भी चर्चा करना आवश्यक है !

 सत्य तो यह है कि वास्तव में पूतना जैसी कोई राक्षसी थी ही नहीं ! बल्कि जिस तरह 14 वीं शताब्दी में यूरोप में कोई भी महिला अपने परंपरागत धर्म के स्थान पर ईसाई धर्म को स्वीकारने का विरोध करती थी तो उसे ईसाई पादरी चुड़ैल कहकर सार्वजनिक रूप से भीड़ के सामने जिंदा जला दिया करते थे ! जिसके लिये उस ईसाई पादरी को राजसत्ता से सहयोग और संरक्षण दोनों प्राप्त होता था !

 ठीक इसी तरह तथाकथित द्वापर युग में जब कंस के पिता उग्रसेन को भावनात्मक रूप से मूर्ख बना कर मथुरा की सत्ता को हड़पने के लिये कृष्ण के पिता वासुदेव प्रयास कर रहे थे ! इसी उद्देश्य से वासुदेव ने कंस की बहन देवकी से पूर्व की 11 पत्नी होने के बाद भी विवाह किया था !

 जब इस बात की जानकारी कंस को मिली तब कंस ने अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये और देवकी को वासुदेव की 12 पत्नी और 42 बच्चों के साथ उनके राज महल में नजर बंद करवा दिया था और अपने पिता उग्रसेन जी महाराज को सत्ता से हटाकर स्वयं को मथुरा का राजा घोषित कर दिया था ! 

क्योंकि उग्रसेन जी महाराज में राजनीतिक समझ नहीं थी इसलिए वासुदेव उनका भावनात्मक रूप से शोषण करके स्वयं मथुरा की गद्दी पर काबिज होना चाहते थे !

इसी नजरबंद काल के दौरान वासुदेव को अपनी 12 पत्नियों से 24 बच्चे प्राप्त हुये ! जिनमें से दो बच्चों को वासुदेव अपने चचेरे भाई नंद जी के पास भेजने में सफल हो गये ! जिन्हें बाद में बलराम और श्रीकृष्ण कहा गया !

 जब इस बात की जानकारी कंस को हुई तो कंस ने सत्यता को जानने के लिए अपने बचपन के मित्र तथा सेनापति प्रद्युम की पत्नी स्वाति को नंद बाबा के गांव गोकुल भेजा ! जहां पर गांव के सभी लोगों ने मिलकर स्वाति को दौड़ा-दौड़ा कर मार डाला और कोई सबूत न बचे इसके लिए गांव के बाहर एक बगीचे में उसके हाथ पैर कुल्हाड़ी से काटकर अलग-अलग स्थानों पर जला दिया !

 इसके बाद नंद बाबा के गांव गोकुल में यह भय व्याप्त हो गया कि कंस किसी और भी मुखबिर महिला को भेज सकता है ! अतः गोकुल क्षेत्र की सभी महिलाओं ने अपने बच्चों को स्पष्ट रूप से मना किया कि वह अनजान महिलाओं से संपर्क और संवाद न करें !

  ब्रज में पुत्र को पूत कहा जाता है ! क्योंकि ब्रज क्षेत्र की सभी महिलाओं ने अपने पुत्रों को किसी भी अन्य अनजान बाहरी महिला से वार्ता करने के लिए मना किया था ! अत: उसे ब्रज भाषा में “न-पूत-न”  शब्द से संबोधित किया गया ! जिससे पूतना शब्द निकल कर आया !

 वास्तव में वैष्णव लेखकों द्वारा जिसे पूतना राक्षसी बतलाते हैं ! वह कंस के बचपन के मित्र और मथुरा सेनापति प्रद्युम्न की पत्नी स्वाती थी ! जो कि एक चंद्रवंशी क्षत्रिय थी !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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