बलात्कार का मनोविज्ञान : Yogesh Mishra

बलात्कारकी घटना हमारे ही सभ्य समाज में क्यों होती है ! यह आदिवासी या तथाकथित अति पिछड़े अविकसित क्षेत्रों में क्यों नहीं होती है ! जहाँ आधुनिकता की मार अभी तक नहीं हुई है ! किसी कामुक साहित्य या कामुक टी.वी. शो की मांग वहां क्यों नहीं है !

इसके पीछे एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक कारण है ! तथाकथित सभ्य समाज के सभ्य लोगों को स्त्री के शरीर में कामुक दृष्टि से सर्वप्रथम स्तन ही दिखलाई देने का मतलब ही यह है कि बच्चे का जो रस स्तनपान में था, वह आधुनिक माताओं के कारण अपूर्ण ही रह गया है ! बच्चे द्वारा माँ का स्तनपान पूरी तरह से नहीं गया ! जिससे बच्चे का भावनात्मक बौद्धिक विकास पूर्ण नहीं हुआ !

इसलिए आदिवासियों में जाएं, जहां बच्चे पूरी तरह अपनी मां का स्तनपान लम्बे समय तक करते हैं ! वहां युवा किसी की कामुक उत्सुकता स्तन के प्रति होती ही नहीं है ! जबकि वहां स्तन को छिपा कर रखने का कोई विशेष विधान भी नहीं है ! अगर आप आदिवासी स्त्री को, हाथ रखकर भी उसके स्तन पर, पूछें कि यह क्या है? तो वह कहेगी कि बच्चे को दूध पिलाने के प्राकृतिक थन हैं ! बस

 किन्तु हमारे सभ्य समाज के सभ्य पुरुष ही नहीं बल्कि स्त्रियों की भी कामुक निगाह दूसरे स्त्रियों के स्तन पर ही लगी रहती है और मानसिक रोग की पराकाष्ठा तो यह है कि दूसरी स्त्री का स्तन न सही तो वह अपने ही स्तन को सजाती सवारती रहती हैं !

फिर चाहे हम फिल्म देखने जाएं, चाहे उपन्यास पढ़ें, चाहे कविता करें, चाहे कहानी लिखें, स्तन एक बिलकुल जरूरी विषय बन जाता है ! जो अपूर्ण आकर्षण हजार अपराधों की जड़ है ! ऐसा लगता है कि तथाकथित सभ्य समाज के लोग स्तनों के आकर्षण के बीमारी से गंभीर रूप से ग्रसित हैं ! उसी में जीते मरते रहते हैं ! यही समलैंगिक विकृत आकर्षण का मुख्य आधार भी है ! इसी मानसिक रोग के कारण हमारे सभ्य समाज में स्त्री का अस्तित्व गौण है पर उसके स्तन के प्रति आकर्षण मुख्य है !

यही स्तन के प्रति अविकसित बौद्धिक आकर्षण साधना विहीन नकली धार्मिक आडम्बर युक्त जीवन का आधार है ! जिसमें ब्रह्मचर्य को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है ! जो हठ पूर्वक साधा गया ब्रह्मचर्य अनजाने ही मनुष्य से अनेकों अपराध करावाता है ! जिसमें एक बलात्कार भी है !

पैसे के प्रभाव से बिना प्रेम से विकसित किया गया, किसी स्त्री या पुरुष का दैहिक शोषण भी बलात्कार की श्रेणी में ही आता है ! भले ही हम उस स्त्री या पुरुष के विरोध को पैसे के प्रभाव से सहमति में बदल कर कानून की निगाह में बच जायें !

और फिर इस सफलता के बाद व्यक्ति पैसे के प्रभाव से बलात्कार करने के लिये भी पैसा कमाना चाहता है ! जिस लिये अपनी योग्यता से अधिक पैसे को कमाने के लिये भी वह व्यक्ति अनेक प्रकार के अपराध करता है ! बड़ा मकान, बड़ी गाड़ी, बड़ा पैसा, बड़ा सम्मान, बड़ा भोग विलास आदि आदि बहुत कुछ के पीछे प्राय: हमारा अविकसित कामुक बौद्धिक स्तर ही काम करता है !

इसी स्त्री के स्तन के प्रति उत्सुकता ने इतिहास को कई स्थान पर मोड़ दिया है ! फिर चाहे वह पुष्यमित्र शुंग का उदय हो या भारत के बंटवारे का इतिहास ! चाणक्य की विष कन्या हो या मुगलों के हरम में भेजी गयी हिन्दुओं की बहू बेटियां !

आज बाजार में 300 लाख करोड़ की कामुक दवा, शराब, शबाव और कंडोम का जो धंधा है ! उन सभी के पीछे एक मात्र यही कारण है ! अशक्त, अविकसित बौद्धिक व्यक्ति का स्त्रीयों के स्तन के प्रति उत्सुकता !

इसने ही बलात्कार के हजारों रूप प्रगट किये हैं ! अर्थात कहने के तात्पर्य यह है कि बलात्कार मात्र किसी का शाररिक शोषण नहीं बल्कि विकृत मानसिकता से समाज का शोषण कर अपनी योग्यता से अधिक सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ कर अपने भोग विलास, कामुकता, सुविधा के लिये जो धन संग्रह का प्रयास है, वह भी बलात्कार ही है !

जिसमें समाज को आकर्षित करने के लिये उटपटांग अश्लील वस्त्र पहनना भी शामिल तो है ही साथ ही वह लोग भी शामिल हैं जो इस उटपटांग अश्लील वस्त्रों की अनुचित पैरवी भी करते हैं !

यही स्थिती कमोवेश प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध समलैंगिक विवाह की पैरवी करने वालों के मानसिक रोगियों की भी है ! मेरी दृष्टि में वह लोग भी ईश्वरीय व्यवस्था के बलात्कारी ही हैं ! जो समाज और प्रकृति दोनों से विपरीत जाकर ईश्वर के साथ विश्वासघात करते हैं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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