लक्ष्य प्राप्ति की यात्रा में सैकड़ों असफलता के पड़ाओ आते ही हैं । जो उन्हें पार कर जाता है, वहीं लक्ष्य तक पहुंच पाता है ।
जब हम कोई बड़ा और दूरदर्शी विजन लेकर चलते हैं, जब समाज के विकास के लिए कोई बड़ा केंद्र या शिक्षण संस्थान स्थापित करना चाहते हैं, तो शुरुआती योजनाएं अक्सर ज़मीनी हकीकत और चुनौतियों से भरी होती हैं।
यह अप्रत्यशित बाधाएं हमें अपनी योजनाओं को अधिक ठोस और व्यावहारिक बनाने का प्रशिक्षण देती हैं।
हर असफलता हमें कुछ न कुछ सिखा कर जाती है। यह एक प्रकार का आत्म-नियंत्रण का प्रशिक्षण और तप है, जो हमें बाहरी शोर और चुनौतियों के बीच अपने लक्ष्य पर अडिग रहने का प्रशिक्षण देती है।
जो व्यक्ति इन पड़ावों पर निराश होकर रुकने के बजाय, अपनी गलतियों का विश्लेषण और सुधार करते हुये, आगे बढ़ता रहता है, वही अंततः एक स्थायी और सफल लक्ष्य का निर्माण कर पाता है।
मतलब मंज़िल उसी को मिलती है, जो यह मानकर चलता है कि रास्ते की हर ठोकर उसे गिराने के लिए नहीं, बल्कि सँभाल कर चलना सिखाने के लिए लगती है !
यही सफलता का सूत्र है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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