सरल शब्दों में समझा जाये तो किसी भी रोग के लिए एक प्रयोगात्मक समय होता है ! इस दौरान रोग के कारण को ढूंढा जाता है ! फिर उस रोग के निदान के लिए विभिन्न तरह के शोध कार्य किये जाते हैं, तब उस रोग की औषधि बनती है !
फिर उस निर्मित औषधि का परिक्षण और प्रयोग प्रतीक रूप में कुछ जीव जंतु और मनुष्य आदि पर किया जाता है और उसके परिणाम देखे जाते हैं !
जब उस औषधि पर काम करने वाले वैज्ञानिक पूरी तरह से संतुष्ट हो जाता हैं, तब उस औषधि का बहुत बड़े पैमाने पर उत्पादन करके उस औषधि को मानवता के कल्याण के लिए समाज के हाथ में सौंप दिया जाता है !
ठीक इसी तरह से सनातन ज्ञान पीठ लंबे समय से मनुष्य के जीवन के संघर्ष को कम करने के लिये मनुष्य की वृत्ति का परीक्षण कर रहा था और यह समझन की कोशिश कर रहा था कि मनुष्य के जीवन में संघर्ष क्यों है और उसका निदान किस प्रकार किया जा सकता है ?
तब सनातन ज्ञान पीठ लम्बे समय तक शोध करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि भगवान शिव द्वारा दिख लाये गये मार्ग का अनुगमन करके मनुष्य के जीवन के संघर्ष को कम किया जा सकता है ! जब इस विज्ञान का पता चला तो उसे “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” के नाम से जाना गया !
गत 3 वर्षों से इस “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” के ऊर्जा विज्ञान पर सैकड़ों परीक्षण किये गये और शत प्रतिशत सफलता प्राप्त कर लेने के बाद, अब अगले चरण में सनातन ज्ञान पीठ इस “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” के विज्ञान को मानवता के कल्याण के लिए समाज में प्रस्तुत करने जा रहा है !
सनातन ज्ञान पीठ का यह विश्वास है कि “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” जब आम जनमानस के मध्य लोकप्रिय होगा तो मनुष्य के जीवन का संघर्ष स्वत: समाप्त हो जायेगा और मानवता जो संघर्ष समाप्त करने के लिये सैकड़ो साल से भटक रही है, वह अपने कल्याण और आनंद की दिशा में आगे बढ़ जाएगी !
आज हमारा संकल्प है कि हम अपने जीवन काल में ऐसे 10,000 से अधिक व्यक्तियों को तैयार करें, जो मानवता के कल्याण के लिए “ब्रह्मास्मि क्रिया योग” के गुप्त विज्ञान को आम जनमानस के लोकप्रिय बनायें ! जिससे मानवता निरंतर शांति के साथ उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सके !
सनातन ज्ञान पीठ अब इसी दिशा में कार्य करेगा !!
