रूस की क्रांति का भारतीय महिलाओं पर प्रभाव  : Yogesh Mishra

          रूस की क्रांति के प्रभाव भारत में न केवल क्रांतिकारियों मजदूर और राजनीतिक संगठनों एवं राष्ट्रीय नेताओं पर ही पड़े बल्कि भारतीय महिलाएं भी इसके प्रभाव से अछूती  न रह सकीं !  अंग्रेजी सरकार ने भारत में रूस की क्रांति और बोल्शेविक सरकार के विरुद्ध जमकर प्रचार किया ! अंग्रेजों ने रूस की नई सरकार की धर्म विरोधी ! भगवान-विरोधी और परिवार में नैतिकता को समाप्त करने वाली बतलाया !  इसी कारण भारतीय महिलाऐं रूस की क्रांति के परिणामों से लगभग 20 वर्ष तक अनभिज्ञ रही !

       इसी बीच के समय में बहुत सारे भारतीय क्रांतिकारी सोवियत रूस जाकर वहां से वापस भारत आ चुके थे !  वह अपने साथ क्रांति के संबंध में प्राथमिक जानकारी और साहित्य भी लायह थे ! इन साहित्यों में रूस की महिलाओं का क्रांति में योगदान का वर्णन था !

      1917 की क्रांति में रूसी महिलाओं के योगदान और त्याग से प्रभावित होकर भारतीय महिलाओं और नौजवान लड़कियों ने अब भूमिगत क्रांतिकारी दलों को सहयोग देना प्रारंभ किया !  बंगाल उस समय क्रांतिकारियों का गढ़ समझा जाता था !  यहीं पर साम्राज्यवाद से प्रभावित होकर प्रथम महिला सुहासिनी गांगुली कम्युनिस्ट दल की  सदस्य बनीं  और जेल भी गयीं ! 

एक नौजवान बंगाली लड़की कल्पना दत्त जो “चटगांव और आर्मरी रेड” केस में शामिल थी ! लेनिन व रूसी क्रांति से बहुत प्रभावित थी !  जेल जाने पर इन महिलाओं ने रूसी क्रांति से संबंधित साहित्य को पढ़ा और अधिक पढ़ा !  इनके साथ कमला चटर्जी ! इंदु सुधा और शांति घोष ! ने भी जो बाद में शांतिदास के नाम से जाने गयीं ! कम्युनिस्ट दल की सदस्यता ग्रहण की !

कुछ  और महिलाएं थीं जो जेलों  में रहने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य तो नहीं रही लेकिन क्रांतिकारी साहित्य को पढ़ती रहीं !  विमल प्रोतिमा, कल्याणी भट्टाचार्य, इंदुमती सिन्हां, आदि !

इसी तरह बंगाल के अतिरिक्त पंजाब, दिल्ली और मध्य प्रांतों में तथा भगत सिंह और दूसरे क्रांतिकारियों के साथ भी बहुत सारी महिलाएं थीं  ! जो रूस की क्रांति से प्रभावित थीं ! यह सभी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहीं !

इनमें प्रमुख दुर्गावती बोहरा, (सांडर्स केस)  प्रकाशवती पाल,  बम्बई, कोलकाता और अहमदाबाद के मजदूर आंदोलन में तथा 1928 की ऐतिहासिक ‘गिरनी कामगार यूनियन’ के कार्यक्रमों और आंदोलनों में उस्तानी डांगे, सुहासिनी  नांबियार, मीनाक्षी सरदेसाई जैसी महत्वपूर्ण नारियां रूस की क्रांति से प्रेरित थीं !

         लेबर पार्टी, बोल्शेविक पार्टी, सीपीआई तथा अन्य मजदूर संघों में भी भारतीय महिलाओं ने रूसी क्रांति से प्रभावित होकर मजदूर आंदोलनों और स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लिया ! जिसमें सुधा राय, चांदो बीवी, मैत्रायी बोस, अंबुताई बाहरी, प्रभावती दास गुप्ता आदि प्रमुख थीं ! जिन्होने 1930 के आसपास विदेशों से भारतीय छात्रों ने रूसी साहित्य को भारत में पढ़ने के लिए कुछ संगठनों की स्थापना की ! 

ऐसी अनेकों महिलाएं जो गांधी के नेतृत्व में जेलों में गईं ! वह सभी जेल में रूसी क्रांति का अध्ययन करती थीं !  कुछ ऐसी महिलाएँ भी थीं जो समाजवादी दलों में नहीं थी लेकिन फिर भी समाजवाद का अध्ययन करती थीं और रूस की क्रांति से प्रभावित थीं ! उनमें कमलादेवी चट्टोपाध्याय, मनीबेल कारा, सत्यवती देवी और पूर्णिमा बनर्जी आदि प्रमुख थीं ! जिनकी समाज में सक्रीय भूमिका थी !

       जब भारतीय महिलाओं को पता चला कि अब रूस में महिलाएं पुरुषों के साथ और समान रूप से कारखानों, स्कूलों और संसद तथा अस्पतालों में काम कर रही हैं ! तो उनमें भी अपने अधिकारों के प्रति चेतना जागृत हुई ! यूरोप की उदार शिक्षा और रूसी महिलाओं के विषय की जानकारी ने भी भारतीय महिलाओं में महिलाओं के अधिकारों के आंदोलन को आगे बढ़ाया !

    रामेश्वरी नेहरू ने जो महिलाओं के अधिकारों के आंदोलनों की नेता कही जाती हैं ! 1924 में पुरुषों के समान महिलाओं के अधिकार की मांग करते हुए रूस की महिलाओं के उदाहरण पेश किये !  1932 में रामेश्वरी नेहरू स्वयं सोवियत रूस गयीं तथा अंत तक वहां पर महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता की सराहना करते रहीं !

सरोजिनी नायडू भी रूस में अपने मित्रों के माध्यम से रूसी महिलाओं के विषय में जानकारी प्राप्त करती रहती थी  ! अरूणा आसफ अली ने राजनीति में प्रवेश रूस की क्रांति से प्रभावित होकर ही किया था ! इसी तरह अन्य अनेकों भारतीय महिलाएं भी जो सक्रिय रूप से राजनीति में तो प्रवेश न कर सकीं, पर उन दूसरी महिलाओं की समर्थक थीं जो रूस की क्रांति का समर्थन खुले रूप से करती थीं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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