विश्व के मानचित्र में असुरों का योगदान : Yogesh Mishra

इस पृथ्वी का सबसे पहला नक्शा ईसा से 9,323 पूर्व सूर्य सिद्धान्त के आधार पर रावण के ससुर अर्थात मंदोदरी के पिता असुर राज राजा मय द्वारा बनाया गया था !

इसी तरह इसी के समकालीन रावण के भाई कुंभकरण ने भी अन्तरिक्ष यात्रा हेतु सम्पूर्ण अन्तरिक्ष का नक्शा तैय्यार किया था और रावण की वैश्विक सत्ता को नियंत्रित करने हेतु उपग्रह भी छोड़ा था ! जिसे अभी वर्तमान में नासा ने खोज निकला है !

असुर राज राजा मय के अनुसार वर्तमान एशिया जहाँ पर उस समय मानव सभ्यता विकसित हो रही थी ! वह सात लोकों (हिस्सों) में बांटीं थी !

(1) विन्ध्य पर्वत माला से दक्षिण का भू भाग भू लोक कहलाता था ! (2) विन्ध्य पर्वत माला से उत्तर हिमालय तक भाग भुवः अर्थात मध्यम लोक कहलाता था ! (3) कश्मीर और ताजकिस्तान वाला क्षेत्र  स्वर्लोक ! जिसे वैष्णव ने स्वर्ग लोक कहा है ! यहीं से इंद्र ने युधिष्ठिर के लिये रथ भेजा था ! इसके पहले भी राम रावण युद्ध के समय राम के लिये अपना युद्ध रथ भेजा था ! (4) हिमालय से उत्तर की ओर वर्तमान रूस का साइबेरिया क्षेत्र तपः लोक ! (5) वर्तमान चीन क्षेत्र महर्लोक ! (6) चीन के ऊपर और रूस के नीचे का मंगोलिआ क्षेत्र जनः लोक और (7) वर्तमान रूस से उत्तरी ध्रुव का वृत्त क्षेत्र सत्यलोक घोषित किया था !  

इस प्राचीनतम नक़्शे को 6-6 अंश के अन्तर पर 60 काल-खण्ड में विभाजित किया गया था ! जिन्हें चार अलग अलग रंगों से रंगा जाता था !

अधिकांश स्थानों का नाम लंका रखा गया था ! लंका का तात्पर्य सभी काल खण्ड या नक़्शे के मूल बिन्दु से था ! इंगलैण्ड का स्टोनहेन्ज, उज्जैन से 13 काल-खण्ड पश्चिम में था ! अतः इस क्षेत्र को भी लंका शायर कहते थे ! जो रावण के आधीन था !

अन्तिम लंका वाराणसी अर्थात काशी थी ! जहां राजा सवाई जयसिंह ने अपनी ज्योतिष की वेधशाला बनायी थी ! वर्तमान श्रीलंका उस समय सिंहल कहलाती थी ! रावण काल में यह राजनीतिक रूप से रावण साम्राज्य की राजधानी थी !

 इण्डोनेसिया को शुण्डा द्वीप कहा जाता था क्योंकि यह विश्व मानचित्र में हाथी की सूंढ़ जैसा दिखाई देता था ! इस तरह रावण का साम्राज्य सप्त-राज्य द्वीप में से 4 मुख्य द्वीपों तक फैला था !

जो वर्तमान आस्ट्रेलिया जिसे उस समय सुवर्ण द्वीप अत्यधिक सोना होने के कारण या अग्नि द्वीप लंका से अग्नि कोण में होने के कारण कहा जाता था !

रावण की राजधानी सिंहल जो वर्तमान लंका है ! वहां से पश्चिम अफ्रीका से आस्ट्रेलिया तक का शासन रावण के नाना सुमाली देखा करते थे ! इसीलिये इसे सुमालिया क्षेत्र भी कहा जाता था !

रावण की राजधानी सिंहल वर्तमान लंका से दक्षिण का भूभाग जहाँ अब हिन्द महा सागर है उस भू भाग पर कुंभकरण की अंतरिक्ष प्रयोगशाला थी ! जहाँ वह निरंतर अन्तरिक्ष विज्ञान में शोध हेतु छ: मास तक रहता था तथा वर्ष में दो बार अपने भाई रावण से मिलने आता था ! इसीलिये कहा जाता था कि कुंभकर्ण छ: माह तक सोता था और रावण के दरबार में कोई रूचि नहीं लेता था ! जबकि वह अपने वैज्ञानिक टीम के साथ रात रात भर जाग कर अन्तरिक्ष विज्ञान में नये नये शोध करता था और दिन में विश्राम के लिये सोता था !

क्योंकि मात्र रात के अँधेरे में ही ग्रह नक्षत्रों की गति को पढ़ा और जाना जा सकता है  !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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