(शोध परक लेख)
प्राय: समाज में शनि की महादशा अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा बड़े भय से देखी जाती है ! साथ ही नव उदित ज्योतिष के अनुसार अब शनि की ढैया और साढ़ेसाती को भी भय से देखे जाने का प्रचलन शुरू हो गया है !
प्रश्न यह है कि शनि को इतना भय से देखा क्यों जाता है ! जबकि दूसरी तरफ शनि को न्याय का देवता भी कहा गया है !
आज मैं इसी का उत्तर देने की कोशिश करता हूं !
इसका सीधा उत्तर है कि बृहस्पति विस्तार का ग्रह है ! जिस तरह गुरु अपने शिष्य का मनोबल बढ़ाने के लिए उसकी कम योग्यता के बाद भी उसे प्रोत्साहित करने के लिये उसे शाबाशी में कुछ न कुछ उपहार देते रहते हैं !
ठीक इसी तरह बृहस्पति की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा में व्यक्ति के अंदर योग्यता, क्षमता, प्रतिभा, दया, करुणा, पात्रता आदि न होने पर भी बृहस्पति जातक को प्रोत्साहित करने के लिए, उसे वह सभी अप्रत्याशित सफलता दे देता है ! जिसका वह अधिकारी नहीं होता है !
जिसे दुर्भाग्यवश जातक अपनी योग्यता, प्रतिभा, क्षमता, पुरुषार्थ आदि का पुरस्कार समझ लेता है ! और यह मानने लगता है कि जातक इन सभी चीजों को प्राप्त करने का अधिकारी है और व्यक्ति इसी अहंकार में अपने को अति पुरुषार्थी और ज्ञानी समझने लगता है ! जबकि वास्तव में सत्य में ऐसा नहीं होता है !
और शनि की महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशा, शनि की ढैया या साढ़ेसाती जब आरंभ होती है ! तब बृहस्पति द्वारा जो अतिरिक्त सफलता दी जाती है, उसे शनि अनुशासन के नाम पर उन सभी अतिरिक्त प्राप्त सफलताओं को नष्ट कर देता है ! जिस वजह से स्वार्थी संसार शनि को भला बुरा कहता है !
लेकिन इसके विपरीत यह भी देखा गया है कि बृहस्पति की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा में जिस व्यक्ति को अपनी योग्यता के अनुसार पद, प्रतिष्ठा, सम्मान, धन आदि प्राप्त नहीं होता है ! शनि की महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशा, ढैया या साढ़ेसाती के आरंभ होते ही उस व्यक्ति को वह सब कुछ मिल जाता है जिसका वह वास्तव में अधिकारी होता है ! शायद इसीलिए शनि को न्याय का देवता कहा गया है !
दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि यदि आप में योग्यता है और आप प्रकृति के सिद्धांतों का अनुपालन करते हैं तो शनि आपके लिए शुभ होगा और यदि आप अहंकार में हैं और प्रकृति के सिद्धांतों के विपरीत जीवन यापन करते हैं तो यह निश्चित समझ लीजिए कि शनि आपको दंडित करेगा !
इसलिए शनि के दंड से बचने के लिए प्रकृति के सिद्धांतों का पालन करते हुए विनम्रता पूर्वक जीवन यापन कीजिए ! इससे आपको संसार में धन, यश, प्रतिष्ठा आदि सांसारिक सुख प्राप्त होगा !
क्योंकि इस पृथ्वी पर शनि ही न्याय के देवता हैं और मृत्यु के उपरांत इनके अपने सगे भाई यमराज न्याय के देवता हैं ! इसलिए किसी के साथ अन्याय करके या प्रकृति के नियमों की अवहेलना करके आप सुखी नहीं रह सकते हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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