कौल तंत्र अर्थात शैव कुल में प्रवेश करने वाला तंत्र !
कौल तंत्र, तांत्रिक विधानों में सर्वश्रेष्ठ तंत्र विधान माना जाता है ! क्योंकि यह पूर्ण अद्वैत भावना में रमने वाले दिव्य साधक के शिव ने माता पार्वती को बतलाया था ! यह तंत्र पूर्णत: गम्य, सहज और अनुसरणीय है।
एक तांत्रिक परंपरा शक्ति अर्थात पार्वती और शिव के विशिष्ट अनुष्ठानों से जुड़ी है ! यह शक्तिवाद और शैववाद का संयुक्त अधिकारिक तंत्र विधान है ।
कौल तंत्र शिव से कीलित अत्यंत गहन तंत्र विधान है । यह अगम्यागमन, धूर्त, उन्मत्त, चूगलखोर, झूठे, पाप वार्ता करने वाले या साधना के पूर्वाग्रही साधकों के लिये नहीं है ! अन्यथा शिव के कीलन प्रभाव से ऐसे साधक साधना की तीव्र ऊर्जा बढ़ने पर स्वत: नष्ट हो जाते हैं ! इसलिये बेहतर है ऐसे वृत्ति के साधक स्वत: कौल तंत्र साधना छोड़ दें ।
इसमें मुख्य छह आयामों को एक क्रम में लाना पड़ता है ! स्थूल पिण्ड, युगल पिण्ड, सूक्ष्म श्वांस, जीवनी ऊर्जा, मन और बुद्धि ।
कौल तंत्र साधक की आत्मनिर्भरता अर्थात बिना वाह्य पदार्थ का तंत्र, मुक्ति अर्थात बिना धार्मिक रीति रिवाज का तंत्र, और स्वतंत्रता अर्थात अज्ञात भय ( पूर्वाग्रह ) से मुक्त चित्त से की गयी साधना पर जोर देता है ।
इस तंत्र विधान में सभी साधकों के गुरु शिव स्वयं हैं ! आप शिव के आध्यात्मिक कुल का हिस्सा मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं । अर्थात वापस शिव ओर में प्रवेश कर सकते हैं ! यही इस तंत्र विधान की खासियत है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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