शिव सहस्त्रार साधना के लाभ : Yogesh Mishra

शिव सहस्त्रार साधना शैव जीवन शैली के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने का सर्वश्रेष्ठ साधना मार्ग है !

इस साधना विधान का तत्वज्ञान भगवान शिव द्वारा स्वयं रावण को आचार्य शिष्य परम्परा के तहत दिया गया था !

वैष्णव जीवन शैली में शिष्य स्वयं योग्य आचार्य को ढूंढता है, जबकि शैव जीवन शैली इसके विपरीत है ! इसमें शिष्य से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह स्वयं योग्य आचार्य को ढूंढेगा !

क्योंकि शिष्य का बौद्धिक स्तर इतना विकसित नहीं होता है कि वह स्वयं योग्य आचार्य को ढूंढ सके !

इसीलिये शैव जीवन शैली में आचार्य स्वयं योग्य शिष्य को ढूंढता है ! जिसमें शैव जीवन शैली के तहत ज्ञान प्राप्त करने की मेधा और योग्यता हो, जिससे यह अदभुद ज्ञान आने वाली पीढ़ियों तक निरंतर प्रवाहित हो सके !

 इसीलिए शैव जीवन शैली में निर्धारित गुरु हुये हैं और उनके निर्धारित शिष्य हैं ! जो सभी शिष्य अति योग्य और युग पुरुष हुये हैं ! यहाँ पर वैष्णव गुरुकुलों की तरह गुरुओं के पास शिष्यों की भीड़ नहीं है !

क्योंकि यहां योग्य शिष्य को ही शिक्षा देना उद्देश्य है, जबकि वैष्णव जीवनशैली में शिक्षा देना भी एक व्यवसाय है इसीलिये उन्होंने वर्ण व्यवस्था विकसित की और शिक्षा देने का अधिकार मात्र ब्राह्मणों को दिया !

जो कि गुरुकुलों के माध्यम से एक व्यवसाय के रूप में शिक्षा दिया करते थे ! जिन गुरुकुलों को चलाने वाले आज भी दीक्षित, उपाध्याय, आचार्य आदि सरनेम से जाने जाते हैं !

जबकि शैव शिक्षा परंपरा इसके बिल्कुल विपरीत है ! जिसके तहत भगवान शिव ने रावण की पात्रता को देखते हुये, स्वयं रावण को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया था ! जब कि रावण ब्रह्मा जी के कुल का वंशज था !

और ब्रह्मा जी से भगवान शिव का निरंतर विवाद और संघर्ष रहा है ! ब्रह्मा जी का एक मस्तक भी भगवान शिव ने युद्ध में काट लिया था लेकिन इसके बाद भी रावण की मेधा के योग्यता को देखते हुये भगवान शिव ने रावण को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया !

और उसे शैव तत्वज्ञान द्वारा मात्र ज्योतिष, तंत्र, कर्मकांड, संगीत, वेद आदि का ही ज्ञान नहीं दिया बल्कि उसे विदेह ज्ञान देकर परम मुक्त अवस्था में अमृत्व को भी प्राप्त करने का ज्ञान दिया !

 इसी विषय पर सनातन ज्ञान पीठ के संस्थापक श्री योगेश कुमार मिश्र द्वारा एक विस्तृत शोध व्याख्यान माला आरंभ की जा रही है ! जो साथी इस ज्ञान परम्परा में प्रवेश लेना चाहते हैं ! वह कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं !!

सचिव

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