वैष्णव परंपरा में समाज को नियंत्रित करने के लिए जो पीठों की स्थापना की जाती है, वह बाह्य आडंबर पर आश्रित होती है !
इसी परंपरा के अनुपालन में आज से कुछ समय पूर्व कुछ विकृत मानसिकता के तथाकथित शैवों ने भी पीठों के नाम पर बड़े-बड़े मठ मंदिरों की स्थापना करना शुरू कर दिया था !
इसीलिए अब आपको जगह-जगह शैव परंपरा के पीठ भी बड़े-बड़े मठ मंदिरों की शक्ल में वैष्णव की तरह दिखलाई देते हैं !
लेकिन वास्तव में शैव परंपरा में पीठों के निर्माण के लिए किसी भी बाह्य आडंबर की आवश्यकता नहीं है !
शैव परंपरा के अंतर्गत जब कोई गुरु जो शिव ऊर्जा से ओतप्रोत है और वह अपनी पीठ की ऊर्जा अपनी अगली पीढ़ी को हस्तांतरित करना चाहता है, तो वह उसे गुप्त रूप से अपनी मानसिक शक्तियों से हस्तांतरित कर देता है !
इसके लिए वैष्णव की तरह किसी बाह्य आडंबर या उत्सव की आवश्यकता नहीं होती है !
फिर वह शिष्य समाज में एक सामान्य मनुष्य की तरह जीवन निर्वाह करते हुये अपने गुरु द्वारा प्रदान की गई ऊर्जा का अपनी साधना से निरंतर विकास करता रहता है !
और आवश्यकता पड़ने पर उस ऊर्जा का प्रयोग जनहित या लोक हित में चुपचाप बिना किसी आडंबर के करता रहता है !
कभी-कभी तो स्थिति इतनी विशेष हो जाती है कि उसके अपने परिवार के लोगों को भी यह पता नहीं चलता कि वह व्यक्ति किसी ईश्वरीय ऊर्जा से ओतप्रोत है !
और शैवों में यह परंपरा गुरु शिष्य परंपरा के तहत पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है और समाज को इसकी भनक भी नहीं लगती है !
ऐसे इस पृथ्वी पर हजारों लोग हैं, जो शैव परंपरा में अपने गुरु से प्राप्त पीठ की ऊर्जा का निरंतर विकास कर रहे हैं और जनहित तथा लोक हित में उस शिव ऊर्जा का प्रयोग भी कर रहे हैं !
यह पीठ की ऊर्जा को संचालित करने वाले लोग एकदम सामान्य से देखते हैं, किंतु वह इतने शक्तिशाली होते हैं कि यह किसी भी तथाकथित सामान्य व्यक्ति को अपनी आध्यात्मिक शक्ति से विशेष बना देते हैं और विशेष व्यक्ति को नष्ट कर उसे सामान्य से भी बदतर बना देते हैं !
यह लोग प्रारब्ध के किसी भी क्रम को बदलने का सामर्थ्य रखते हैं !
इनके पास भगवान शिव की कृपा से ऐसी शक्तियां होती हैं कि यह किसी भी मारते हुये व्यक्ति को पुनः जीवित कर सकते हैं ! किसी भी गरीब को धनाढ्य और धनाढ्य व्यक्ति को भी भिखारी बना सकते हैं !
इनके पास इस तरह की कुछ चमत्कारिक शक्तियां होती हैं कि अस्पतालों में पड़े हुए आई.सी.यू. के अंदर के बीमार व्यक्ति को भी, जिस डॉक्टर ने बचने की संभावना से इंकार कर दिया है, उसे भी तत्काल प्रभाव से ठीक कर देते हैं !
यह लोग किसी को भी समस्त सामाजिक प्रतिष्ठा, धन, यश, पद, पुत्र, आदि दे सकते हैं या किसी अहंकारी से सब कुछ छीन सकते हैं, इनके लिए बस एक विचार मात्र ही ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं से कार्य करवाने के लिए पर्याप्य है !
ऐसे लोग भगवान शिव के निर्देश पर निरंतर समाज का शोधन कार्य करते रहते हैं ! ग्रहों के प्रभाव से जिन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं है, उन्हें भगवान शिव के निर्देश पर सब कुछ दे रहते हैं !
और जिन्होंने ग्रहों के प्रभाव से प्रारब्ध वश सब कुछ प्राप्त कर लिया है लेकिन उनमें इसका अहंकार भी है ! यह लोग भगवान शिव के निर्देश पर उनका अहंकार नष्ट करने के लिए उनसे वह सब कुछ छीन लेते हैं ! जिसका उन्हें अहंकार होता है और किसी को कुछ पता भी नहीं चलता है !
इसलिए जिनके पास गुरु शिष्य परंपरा में शैव पीठ की ऊर्जा है, उनके साथ न तो बहुत दोस्ती अच्छी है और न ही दुश्मनी अच्छी है !
उनसे दूरी बना कर रखिए ! जब सामने पड़ जाए तो उनका सम्मान कर दीजिए ! यदि किसी समस्या में हैं तो अपनी समस्या बतला दीजिए ! आपका समाधान स्वयं हो जाएगा !
लेकिन गलती से भी ऐसे व्यक्तियों को अपमानित मत कीजिये, नहीं तो आपका सर्वनाश सुनिश्चित है ! वैसे यह लोग अपनी मौज में स्वत: बहुत कुछ ऐसा देते रहते हैं, जो आप सोच भी नहीं सकते हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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