शैव ग्राम की सर्व कर्म साधना “जाति संघर्ष से मुक्ति और समता मूलक समाज का निर्माण” की दिशा में एक बड़ी पहला है !
आज मानव सभ्यता भौतिक और तकनीकी विकास के अपने चरम बिंदु पर खड़ी है। हमारी उंगलियों पर दुनिया भर की जानकारी है, दूरियों को मिटाने वाले साधन हैं, और शारीरिक श्रम को लगभग शून्य कर देने वाले स्वचालित यंत्र हैं।
फिर भी, एक गहरा विरोधाभास हमारे सामने है ! सुविधाओं के इस अंबार के बीच, आज का मनुष्य इतिहास में पहले से कहीं अधिक थका हुआ, अकेला और भयंकर मानसिक अवसाद (गहन उदासी) का शिकार है। आखिर हमने कहाँ गलती की?
इस खोखलेपन और मानसिक संताप का उत्तर केवल आधुनिक जीवनशैली में नहीं, बल्कि इतिहास की उस सबसे बड़ी और त्रासद भूल में छिपा है, जब मनुष्य ने ‘कर्म’ अर्थात श्रम का विभाजन किया।
मानव समाज की वह आदिम और विशुद्ध अवस्था जहाँ एक ही व्यक्ति भोजन जुटाने, सफाई करने से लेकर ब्रह्मांड के रहस्यों पर चिंतन करने तक के सभी कार्य स्वयं करता था, उसे ही ‘सर्व कर्म साधना’ कहा जाता है।
जब इस साधना को नष्ट किया गया, तो मनुष्य अपनी समग्रता खो बैठा। जब बौद्धिक कार्यों को “पवित्र” और पसीना बहाने वाले शारीरिक कार्यों को “अपवित्र” घोषित किया गया, तब केवल समाज ही जातियों और वर्गों में नहीं बंटा, बल्कि मनुष्य का मस्तिष्क और उसकी आत्मा भी खंडित हो गई।
इसी वैचारिक पतन ने दुनिया की क्रूर जाति व्यवस्था, छुआछूत और अंतहीन सामाजिक संघर्षों को जन्म दिया।
कार्यों का बंटवारा प्रारंभ में केवल एक आर्थिक आवश्यकता थी। मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी तब घटी जब इस विभाजन को ईश्वरीय विधान और पवित्रता का आवरण पहना दिया गया। तत्कालीन प्रभुत्वशाली और कर्मकांडी व्यवस्थाओं ने सर्व कर्म साधना की मूल आत्मा पर सबसे घातक प्रहार किया।
जैसे-जैसे समाज में पुरोहितों और बौद्धिक वर्गों का वर्चस्व बढ़ा, उन्होंने अपने विशेषाधिकारों को सुरक्षित करने के लिए नए नियम गढ़े। यह प्रचारित किया गया कि समाज का यह विभाजन स्वयं विधाता ने किया है, इसलिए इसे बदलना पाप है।
सरल प्राकृतिक उपासना की जगह अत्यंत जटिल कर्मकांडों ने ले ली, जिन्हें संपन्न करने के लिए एक विशेष ‘शुद्ध’ वर्ग की आवश्यकता बताई गई, जिसे शारीरिक श्रम से पूरी तरह मुक्त रखा गया।
लेकिन आज विज्ञान की प्रगति के साथ यह सभी मान्यतायें खोखली और बेबुनियाद हैं ! आज श्रम विभाजन को नयी दृष्टि से देखना होगा, तभी समाज को जोड़े रखा जा सकता है !
जिस दिशा में शैव ग्राम “0 बजट लाईफ स्टाइल” में सर्व कर्म साधना के तहत अहंकार के त्याग और विशेष सामाजिक कर्तव्य बोध साधना के तहत विशेष यौगिक और मानसिक अभ्यास करवाता है ! जिससे समाज अपने मूल स्वरूप में विकसित किया जा सके !
आप भी इस अभ्यास का हिस्सा बन सकते हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553

