प्रयागराज में जन्मे योगेश कुमार मिश्र एक विश्व प्रख्यात भारतीय प्राच्य विद्या के विचारक, इतिहासकार, संवैधानिक शोधकर्ता, ज्योतिष रत्न और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व भारत सरकार के अधिवक्ता हैं। जिन्होंने भारत के प्रथम उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग के निर्माण तथा भारत के प्रथम पूर्ण गौ वध निषेध अधिनियम को संशोधित तथा उसे लागू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है !
इनके पिता न्यायमूर्ति डा.ऋषि राम मिश्र, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक जज थे ! जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में सेंट्रल एक्साइज, कस्टम, टैक्सेशन विधि तथा राष्ट्रीय वा अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन को विकसित करने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया था ! उन्होंने अपने जीवन में भारतीय विधि पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं, जो आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रही हैं !
अधिवक्ता दायित्व से निवृत्ति के बाद श्री मिश्र जी को ‘सनातन ज्ञान पीठ’ और ‘शैव ग्राम’ के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। वह सनातन ज्ञान पीठ, ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान के संस्थापक भी हैं ! जिसमें सनातन प्राच्य विद्या तथा वैश्विक इतिहास पर शोध कार्य किया जाता है !
योगेश जी के 3000 से अधिक संक्षिप्त शोध पत्र आज भी उनकी वेब साईट पर जन सामान्य के अध्ययन के लिये उपलब्ध हैं ! इसके अतिरिक्त श्री मिश्र ने अभी तक 3000 से अधिक सनातन प्राच्य विद्या पर आन लाइन ‘वैश्विक डिजिटल कक्षा’ और संवाद कक्षा भी जन सामान्य के साथ, सनातन संस्कृति के प्रचार और भ्रम निवारण के लिये आयोजित की हैं !
जिसका लाभ विश्व के कई देशों में रहने वाले नागरिकों ने उठा कर अपने जीवन को बदला है ! श्री मिश्र ज्योतिष और तन्त्र के भी मर्मज्ञ विद्वान हैं ! उनकी सैकड़ों ऐसी व्यक्तिगत और वैश्विक भविष्यवाणियां हैं, जो समय के साथ एकदम सही सिद्ध हुई हैं !
वर्तमान ‘शैव ग्राम’ की स्थापना के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य भगवान शिव के आत्मनिर्भर और पूर्ण विकसित, प्राकृतिक, कैश लैश जीवन शैली की समाज में पुन: स्थापना करना है ! जिससे मनुष्य कृत्रिम और तनावपूर्ण जीवन शैली से निकालकर पूर्ण आत्मनिर्भर, प्राकृतिक, सहज और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित जीवन शैली के महत्त्व को समझ कर उसे अपना कर अपना कल्याण कर सके ।
श्री मिश्र व्यक्तिगत रूप से, वह एक पारिवारिक व्यक्ति हैं, जो अपने सामाजिक और बौद्धिक दायित्वों के साथ-साथ एक पति और पिता की जिम्मेदारियों का उत्कृष्ट निर्वहन करते हैं। उन्होंने अपनी समस्त करोड़ों रुपये की पैतृक सम्पति लोक कल्याण में जरुरत मंद लोगों को दान कर दी है ! उनके परिवार पत्नी, पुत्र, पुत्री और बहनें शामिल हैं ! जिन्हें वह बहुत प्रेम करते हैं !
अब वह सनातन धर्म के मूल दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सनातन सिद्धान्त पर अनेकों ‘शैव ग्राम’ नामक आत्मनिर्भर वैश्विक परिवार का निर्माण कर रहे हैं, जो साथी उनके इस कार्य में सहयोगी होंगे, उन्हें जीवन भर आवास, भोजन और प्राकृतिक निर्वाह पूरी तरह से फ्री उपलब्ध करवाया जायेगा ! जिससे मानवता ही नहीं, जीव जन्तु, पशु पक्षी, वनस्पति और प्रकृति सभी का कल्याण हो सके !
क्योंकि उनका मानना है कि “यही भगवान शिव की इच्छा है” !!
शिवम् शुक्ला
जन संपर्क प्रभारी, शैव ग्राम
