शैव जीवन दर्शन के चार कदम  

शैव जीवन दर्शन का पूर्ण स्वरूप :–

पहला कदम :–  दिखावा छोड़कर अपने सहज समर्थ को स्वीकारिये ! आपको सुकून मिलेगा।

दूसरा कदम :–  दूसरों को अपनी स्वतंत्रता से जीने दीजिये ! किसी को अपने तरीके से चलाने की जिद्द मत कीजिये ! स्वतंत्रता हर व्यक्ति का अधिकार है ! कोई आपका शत्रु नहीं है ।

तीसरा कदम :– प्रतिष्पर्धा और आडम्बर से मुक्त रहिये ! जीवन एकदम सरलता से बीतेगा ! जीवन के सभी संघर्ष स्वत: समाप्त हो जायेंगे।

चौथा कदम :–  संवेदनशील और दूसरों के सहायक बनिये ! आपको ख़ुशी मिलेगी ! अपनी संवेदनशीलता को जीव जंतु, पशु-पक्षी और वनस्पतियों तक फैलाइये ! यही से आपको जीवन की पूर्णता का बोध होगा।

संक्षेप में कहें तो जीवन को समझने की शुरुआत खुद की सादगी से होती है और इसकी पूर्णता पूरी चराचर सृष्टि (एकात्म भाव) से जुड़ जाने में होती है। जो पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के दर्द और आनंद से नहीं जुड़ सका, उसका हृदय अभी पूरी तरह जागा ही नहीं है।

शैव जीवन दर्शन का यह विचार सचमुच हमारी चेतना को जगाने वाला और हमें अधिक मानवीय बनाने वाला है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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