संपन्नता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का परिणाम है ! जिस तरह किसी वृक्ष से फल को प्राप्त करने के लिए उस वृक्ष को निरंतर पोषित करना पड़ता है ! ठीक उसी तरह व्यक्ति को संपन्न बनाने के लिए अपने मस्तिष्क को निरंतर संपन्नता के विचारों से पोषित करना पड़ता है !
किंतु अज्ञानता और परिस्थितियोंवश हम ऐसा नहीं कर पाते हैं और संयोग यह भी है कि हमारे मस्तिष्क में संपन्नता के विचार किस तरह पोषित होते हैं, इस विज्ञान को विश्व के किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाया जाता है !
बल्कि इस ज्ञान को संपन्न परिवारों में पिता पुत्र परंपरा में पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता है !
इसीलिए आप देखते हैं कि समाज में संपन्न परिवार और अधिक संपन्न होता चला जाता है, जबकि समाज का दूसरा वर्ग उचित अवसर की तलाश में भटकता रहता है और निरंतर अभाव ग्रस्त ही बना रहता है !
इस तरह के संपन्न परिवारों पर न तो किसी राजनीतिक परिवर्तन का प्रभाव होता है और न ही किसी युद्ध या आर्थिक मंदी का ! बल्कि इसके विपरीत इस तरह के नकारात्मक परिस्थितियों में इन्हें और अधिक संपन्न बनने का अवसर मिलता है ! अनुभव में यह भी आया है कि ऐसे लोग विपरीत परिस्थितियों में तेजी से संपन्न बनते चले जाते हैं !
जबकि इसके विपरीत एक मध्यम वर्गीय परिवार इन्हीं परिस्थितियों में गलत जीवन शैली और बिना किसी आर्थिक रणनीति के पूरे जीवन धन के लिये ही संघर्ष करते हुये अंत में धन अभाव में ही दम तोड़ देते हैं !
ऐसी स्थिति में व्यक्ति निरंतर अपनी संपन्नता को कैसे विकसित करे ! इस हेतु एक विशेष प्रशिक्षण सत्र सनातन ज्ञान पीठ द्वारा संस्थापक श्री योगेश कुमार मिश्रा जी के दिशा निर्देश में आयोजित किया गया है !
इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए तथा, और अधिक जानकारी के लिए आप कार्यालय के संपर्क नंबर पर संपर्क कर सकते हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
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www.sanatangyanpeeth.in
