जब व्यक्ति सामाजिक जीवन जीने का निर्णय लेता है, तब उसके जीवन में निजीता जैसी कोई चीज नहीं रह जाती है !
व्यक्ति के हर कृत्य का विश्लेषण समाज करने लगता है और इस विश्लेषण के आधार पर ही समाज किसी भी व्यक्ति को महापुरुष होने का दर्जा प्रदान करता है !
जो व्यक्ति सामाजिक जीवन जीने के साथ अपना निजी जीवन को समाज से छुपाते हैं, उन्हें समाज महापुरुष नहीं मानता बल्कि छली, कपटी, प्रपंची या आडंबरी मानता है !
इसलिए सामाजिक जीवन जीना भगवान शिव की तरह जीवन जीने के समान है ! जहां अपना निजी जीवन जैसा कुछ भी नहीं होता है !
यहां वैष्णव भगवानों की तरह कोई आदर्श, कोई महल, कोई सुविधा, कोई आडंबर नहीं होता है ! जैसा है, जो है वह सबके सामने है !
दूसरे शब्दों में कहा जाये तो सामाजिक जीवन सहज योग में सम्पूर्ण जीवन जीने की पराकाष्ठा है! जहां पर समाज की निगाह से कुछ भी नहीं छिपता है !
और छिपाना भी नहीं चाहिए क्योंकि जिस समाज के लिए आप जी रहे हैं, अगर आप उस समाज से अपने आप को छिपा रहे हैं, तो फिर आप सामाजिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि समाज को धोखा देने वाले व्यक्ति हैं !
ऐसी स्थिति में पूरे जीवन परिश्रम करने के बाद भी आप समाज का विश्वास कभी नहीं जीत पायेंगे और समाज के सहयोग के अभाव में आप कभी भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएंगे !
इसलिए यदि आप सामाजिक जीवन जी रहे हैं और आप अपने सामाजिक जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको अपना जीवन समाज के सामने पारदर्शी बनाना ही होगा !
आपके हर कृत का विश्लेषण समाज कर रहा है और समाज के विश्लेषण की दृष्टि से ही आपको समाज का सहयोग प्राप्त होगा ! यही सामाजिक जीवन में पारदर्शिता का महत्व है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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