प्राय: लोग पूंछते हैं कि हम दरिद्र क्यों हैं ? उत्तर है ईश्वरीय निवेश न करने के कारण लोग दरिद्र होते हैं, अर्थात जब हम धनवान होते हैं, तो कार्य की प्राथमिकता और धन के अहंकार में जीव जंतु, पशु पक्षी, वनस्पति, गुरु देव धाम, अनाथालय गौशाला, पशुआश्रय गृह आदि का पोषण बंद कर देते हैं !
इसी ईश्वरीय निवेश को बंद कर देने के कारण व्यक्ति के धन भोग की ऊर्जा का क्षय शुरू हो जाता है, और व्यक्ति दरिद्र हो जाता है !
प्राय: संपन्न होने पर व्यक्ति सोना, चांदी, जमीन, शेयर, आदि में भविष्य के लिये निवेश करते हैं, जो माया क्षेत्र के निवेश हैं, इसी निवेश को बचाने की चिंता और तनाव में एक दिन व्यक्ति की असमय मृत्यु भी हो जाती है, इसलिये निरंतर सम्पन्नता के लिये माया क्षेत्र के निवेश के साथ-साथ ईश्वरीय निवेश भी अवश्य कीजिये !
इसी से दरिद्रता से छुटकारा मिलेगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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