हिंदुओं को कथावाचकों से क्यों बचना चाहिये : Yogesh Mishra

जैसा कि हम सभी जानते हैं कथावाचक परजीवी होते हैं ! अर्थात भगवान की कथा के नाम पर  अपनी दुकान चलाने के लिए यह लोग भक्त समूहों को भावुक और गुमराह करके अपना जीवन यापन करते हैं !

 इसीलिए इन्हीं कथावाचक के कारण हिंदू धर्म में अनेक भ्रांतियां और विकृतियां प्रगट हुई हैं ! जिनके कारण आज हिंदू धर्म बहुत से हिस्सों में बट गया है और हिंदू धर्म ग्रंथों पर विधर्मियों को उपहास का अवसर मिलता है !  जिसके कारण हिंदू समाज को लज्जित होना पड़ता है !

जबकि हिंदू धर्म में ऐसे अद्भुत ग्रंथों का निर्माण हमारे पूर्व के ऋषियों, मुनियों, मनीषियों, चिंतकों ने किया है कि आज के वैज्ञानिक समाज में भी बड़े-बड़े विज्ञान के पुरोधा उन ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाए हैं !

 बल्कि दूसरे शब्दों में कहा जाये तो आज का संपूर्ण विज्ञान हिंदू धर्म ग्रंथों पर ही विकसित और पोषित हो रहा है ! किन्तु इन्हीं कथावाचकों के कारण अध्ययन के अभाव में हिंदू सदैव से अपने धर्म ग्रंथों से अनभिज्ञ के बना रहा है !

 उदाहरण के लिये हम श्रीमद्भागवत पुराण को ही लेते हैं ! जिसमें शुकदेव जी महाराज ने राजा परीक्षित को संपूर्ण ब्रह्मांड के निर्माण से लेकर विलय तक की प्रक्रिया की व्याख्या की है ! जिसे सुनकर राजा परीक्षित को ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ था और वह मृत्यु के भय से उरिण हो गये थे !

 जबकि आज के भागवत कथा वाचक श्रीमद्भागवत पुराण के नाम पर 7 दिन तक ढोलक मजीरा पीटते हुए कृष्ण की रासलीला ही करवाते रहते हैं !

 और इस रासलीला के नाम पर कामुक मनगढ़ंत कहानियों को जरुर सुनाते रहते हैं ! जिससे समाज को तो कोई तत्व ज्ञान प्राप्त नहीं होता है, परन्तु विधर्मीयों को भगवान श्री कृष्ण को छिनरा कहने का अवसर जरूर प्राप्त हो जाता है !

 इसी तरह रामकथा में भी अनेकों भ्रातिपूर्ण कहानियां जोड़ी गई हैं ! जिससे भगवान श्रीराम का सम्मान नहीं पड़ता बल्कि चिंतनशील आधुनिक समाज में राम को लेकर अविश्वसनीयता जरूर बढ़ जाती है !

इसीलिए मैं कहता हूं कि यदि हिंदू धर्म को बचाना है तो भावुकता फैलाने वाले कथा वाचकों से हिंदू समाज को बचना होगा क्योंकि भावुकता फैलाने वाले यह कथावाचक हिंदू धर्म के सत्य घटनाओं को विकृत रूप से समाज में परोस कर हिंदू धर्म का सर्वनाश कर रहे हैं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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