आज संसार एकल जीवन शैली के कारण अवसाद की ओर बढ़ रहा है ! पुरानी जीवन शैली में बच्चे माता-पिता के साथ रहते थे, लेकिन पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में व्यावसायिक कारणों से अब बच्चे माता-पिता के साथ नहीं रहते हैं !
परिणाम स्वरूप वृद्धावस्था में जब मनुष्य को “हैप्पी हार्मोन” की जरूरत होती है, तब उस हैप्पी हार्मोन को डेवलप करने वाला कोई सहायक नहीं होता है !
जिससे वृद्धावस्था का जीवनमनुष्य के लिए एक बोझ बन जाता है !
इस समस्या से मुक्ति के लिए यह परम आवश्यक है कि आप हैप्पी हार्मोन किसी न किसी माध्यम से अवश्य डेवलप कीजिए ! जिसके लिए जीव जंतुओं को पालना एक अच्छा विकल्प है !
आप समर्थ और रुचि के अनुसार पेड़ पौधे वनस्पतियों के माध्यम से भी “हैप्पी हार्मोन” डेवलप कर सकते हैं !
हेप्पी हार्मोन में तीन मुख्य हार्मोन शामिल होते हैं जो हमारी भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करते हैं: डोपामाइन, सेरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन। डोपामाइन खुशी और संतुष्टि की भावना पैदा करता है, सेरोटोनिन भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है, और ऑक्सीटोसिन सामाजिक बंधन और विश्वास की भावना को बढ़ावा देता है !
डोपामाइन: डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो हमें खुशी और संतुष्टि महसूस कराता है। जब हम किसी के प्रति प्यार में पड़ते हैं, तो हमारा मस्तिष्क डोपामाइन जारी करता है, जिससे हमें अच्छा महसूस होता है और हम उस व्यक्ति के प्रति आकर्षित होते हैं !
सेरोटोनिन: सेरोटोनिन भी एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो हमारे मूड और भावनाओं को नियंत्रित करता है। प्यार में होने पर सेरोटोनिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे हमें बेचैनी और चिंता महसूस हो सकती है !
ऑक्सीटोसिन: ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन है जो सामाजिक बंधन और विश्वास की भावना को बढ़ावा देता है। इसे “हेप्पी हार्मोन” या “आलिंगन हार्मोन” के रूप में भी जाना जाता है। जब हम किसी के साथ शारीरिक रूप से जुड़े होते हैं, जैसे कि गले लगना या हाथ पकड़ना, तो हमारा शरीर ऑक्सीटोसिन जारी करता है, जिससे हमें सुरक्षित और जुड़ा हुआ महसूस होता है !
जानवरों या वनस्पतियों से संवाद करने से हेप्पी हार्मोन का स्तर बढ़ता है !
इसलिये अपने बुढ़ापे को सुखद बनाने के लिये हेप्पी हार्मोन का विशेष ध्यान रखिये !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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