शैक्षिक डिग्री ज्ञान नहीं अहंकार की सूचक है : Yogesh Mishra

 पूरे विश्व में जब उपनिवेशवाद की शुरुआत हुई और लोग हथियार लेकर दुनियां को जीतने निकल पड़े ! तब दुनियां ने जल्द जीत की इच्छा से हथियारों के विज्ञान का विकास हुआ !

विज्ञान के इस विकास के साथ ही साम्राज्यवादी दृष्टिकोण भी विकसित हुआ ! कैसे जल्दी से जल्दी इस पूरी दुनिया पर शासन किया जाये ! इस इच्छा ने पूरी दुनिया के योग्य व्यक्तियों को चुनचुन का अपने देश में बुलाने का निर्णय लिया !

तब उपनिवेशिक साम्राज्यवादियो ने योग्य व्यक्तियों के चयन के लिये एक नई परंपरा विकसित की ! जिसने परंपरागत अनुभूतिगत ज्ञान के आधार पर व्यक्ति के चयन की प्रक्रिया को बंद कर दिया गया और पाठ्यक्रम के आधार पर प्रशिक्षित व्यक्तियों को उनकी योग्यता को अंक में बदलकर अंक तालिका का निर्माण करना शुरू कर दिया ! जिसे डिग्री भी कहा गया !

 यही अंक तालिका धीरे धीरे व्यक्ति के बौद्धिक विकास का मानक बन गई और जिस व्यक्ति ने जितने अधिक वर्ष तक इन अंक तालिकाओं को अलग-अलग कक्षाओं में संग्रहित किया, वह व्यक्ति उतना योग्य कहा जाने लगा !

 जबकि वास्तव में किसी भी अंक तालिका का किसी भी व्यक्ति के बौद्धिक विकास से कोई सम्बन्ध नहीं है बल्कि दूसरे शब्दों में कहा जाये तो अंक तालिका मात्र मौखिक रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति के प्रशिक्षण के स्तर को निर्धारित करती है, न कि किसी व्यक्ति के बौद्धिक रूप से विकासित होने को !

 कालांतर में यह गलती अब इन उपनिवेशिक साम्राज्यवादी पूजीपतियों को समझ आने लगी है ! इसीलिए गत 10 वर्षों से पूरी दुनिया में अब किसी भी डिग्री या अंकतालिका को कोई महत्त्व नहीं रह गया है बल्कि आप अपने अनुभव के ज्ञान से इन साम्राज्यवादियों की क्या मदद दे सकते हैं ! यह अनुभवगत ज्ञान ही आपके योग्यता का परिचायक रह गया है !

किंतु वर्तमान के यथार्थ से अपरिचित तथाकथित बुद्धिजीवी अभी भी अंक तालिका और डिग्री के अहंकार में व्यर्थ ही ही इस पृथ्वी पर घूम रहे हैं !

 इसी को दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि यह डिग्रियां हमारे अंदर बस अहंकार पैदा करती है, योग्यता नहीं  और योग्य व्यक्ति अनुभव से होता है, न कि किसी अंक तालिका या विश्वविद्यालय की डिग्री से !

इसीलिए दुनिया के अधिकांश बड़े व्यवसाई किसी भी विश्वविद्यालय से किसी भी अंक तालिका या डिग्री को लेकर सफल नहीं हुए हैं बल्कि लाखों अंक तालिका और डिग्री के अहंकार में घूमने वालों को अपने यहां  बौद्धिक बंधुआ मजदूर बना कर रखे हुये हैं !

 इसलिए यदि जीवन में सफल बनना है तो डिग्री के अहंकार से बाहर निकल कर व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करो ! इसी से जीवन सफल होगा वरना पूरे जीवन भर बंधुआ बौद्धिक मजदूर बनकर रह जाओगे !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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