दो दुर्गा के साक्षात् दर्शन : Yogesh Mishra

 आज मैं अपने परिवार के साथ लखनऊ के सबसे विकसित देवी दुर्गा पूजन के पंडाल पर माता के दर्शन करने गया था !

 वहां संयोग से दो दुर्गा के दर्शन हुये !

 एक तो देवी मां के रूप में विराजमान मिट्टी की मूर्ति ! जिसे विभिन्न सुंदर वस्त्र, आभूषण आदि पहनाकर मंच पर विराजमान किया गया था ! जिसके आगे ढोल नगाड़े बज रहे थे !

साथ ही एक दान की पेटी भी रखी थी ! जिसमें बहुत सारा पैसा लोगों ने श्रद्धा बस डाल रखा था ! देवी मां के प्रसाद के रूप में भक्तगण विभिन्न तरह की सामग्रियों का वितरण कर रहे थे ! 

ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अब भारत में न तो कोई नास्तिक बचा है और न ही कोई गरीब !

 किंतु उसी पंडाल क्षेत्र में एक भूखी, गरीब, वृद्ध महिला जिसको पूछने पर उसने अपना नाम दुर्गा बतलाया ! वह भी थी ! जो साक्षात जीती जागती मनुष्य तन धारण किये हुये, एक 70 साल की बेसहारा महिला थी ! जिसका अपना बेटा एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था !

 जिसके शरीर पर वस्त्र फटे हुये थे ! जिसे पंडाल की सुरक्षा में लगे हुये सुरक्षा कर्मीं तथाकथित सुरक्षा कारणों से उसे डांट कर पंडाल के बाहर निकालने का प्रयास कर रहे थे और वह महिला कुछ भीख मिल जाये इस आशा में पंडाल से बाहर जाने को तैयार नहीं थी !

मैं उस महिला के संघर्ष भरे जीवन के इस छोटे से पहलू को देख रहा था और अनुभूति कर रहा था कि मनुष्य जो अपने को 84,00,000 योनियों में सबसे अधिक बुद्धिमान, संवेदनशील, श्रेष्ठ और यथार्थवादी बतलाता है, वह इतना बड़ा मूर्ख कैसे हो सकता है !

कि साक्षात जीवित 70 साल की जीती जागती दुर्गा को धक्के मारकर पंडाल के बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है और मिट्टी की बनी हुई दुर्गा को ढोल नगाड़ा बजा कर उनका स्वागत कर रहा है !

 अद्भुत है यह मानव बुद्धि ! इन्हें बुद्धिजीवी कहा जाये या परम मूर्ख ! इसी विषय पर विचार करते हुए मैंने अपनी जेब में हाथ डाला और सहयोग से जेब के अंदर लगभग 500/= रुपये के फुटकर नोट थे ! जिन्हें मैंने उस वृद्ध गरीब महिला के हाथों में थमाते हुये उससे कहा “मां इस संवेदना विहीन समाज में आपको कोई कुछ नहीं देगा, यह लो बस मिट्टी की मूर्ति पूजना जानते हैं, साक्षात मनुष्य की नहीं !

 इसलिए आप अपने घर जाकर विश्राम कीजिए !

 अपने हाथों में अचानक इतने सारे पैसे देख कर वह महिला रोते हुए मुझे आशीर्वाद देते हुए उस पंडाल से विदा हो गई !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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