दरिद्रता एक प्रजाति है : Yogesh Mishra

 प्राय: लोग दरिद्रता का संबंध शिक्षा से जोड़कर देखते हैं ! जबकि अनुभव में यह आया है कि यदि दरिद्र प्रजाति का व्यक्ति शिक्षित हो भी जाये तब भी वह दरिद्र ही बना रहता है !

 इस अनुभव से यह कहा जा सकता है कि दरिद्रता एक विशेष प्रजाति है ! इसका देश, काल, परिस्थिति, शिक्षा, परिवेश आदि से कोई संबंध नहीं है !

 यहां हम दरिद्र प्रजाति के व्यक्तियों के कुछ लक्षण बतला रहे हैं ! जिससे इस प्रजाति के व्यक्ति की पहचान की जा सकती है !

 दरिद्र प्रजाति के व्यक्ति को यह सबसे बड़ी गलतफहमी होती है कि वह सब कुछ जानता है अब उसको इस दुनिया में कुछ भी सीखने की आवश्यकता नहीं है और न ही वह नये विषयों का अध्ययन करना चाहता है !

दरिद्र प्रजाति का व्यक्ति सदैव तर्क की जगह कुतर्क, चीख, चिल्लाहट और हिंसा पूर्वक अपनी बात मनवाना चाहता है ! उसके पास अपने तर्क को रखने के लिए पर्याप्त शब्दकोश नहीं होते हैं !

 दरिद्र प्रजाति का व्यक्ति प्रायः अंतर्मुखी आत्म केंद्रित और आत्म मुग्ध तो होता ही है ! साथ ही वह सदैव असंवेदनशील और अव्यावहारिक सोच भी रखता है !

 ऐसे व्यक्ति किसी विशेष भगवान, राजनीतिक दल या किसी बड़े नेता को अपना आदर्श मानकर उसकी भक्ति और गुणगान में लगे रहते हैं जबकि यथार्थ से उस गुणगान का कोई लाभ जीवन में कभी नहीं होता है !

ऐसे लोग टीवी डिबेट और समाचार सुनने के बड़े शौकीन होते हैं ! सुबह का अखबार और चाय का प्याला इनकी पहली प्राथमिकता होती है ! आश्चर्यचकित कर देने वाली सूचनाओं को यह लोग बड़ी जोर से प्रचारित प्रसारित करते हैं ! जैसे कोई पुल टूट गया, कोई फिल्म स्टार मर गया, कहीं युद्ध छिड़ गया, कोई विशेष व्यक्ति किसी विशेष यात्रा पर जा रहा है ! आदि आदि

ऐसे लोग बात बात में धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हैं ! भगवान की दुहाई देते हैं ! भाग्य को बहुत महत्व देते हैं ! साधु, महात्मा, बाबा, बैरागी, मजार, फकीर, मौलाना आदि की चर्चा करते हुए यह लोग नहीं थकते हैं !

यह लोग दूसरों के कार्यों के किस्से कहानी सुनाने में बहुत विश्वास रखते हैं और इनमें यदि कोई सरकारी नौकरी पा जाये तो उसे अपने किस्से कहानी सुनाने में भी बड़ी रूचि होती है ! अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसे लोग बीती हुई बातों में अधिक रूचि लेते हैं !

 दरिद्र प्रजाति के व्यक्ति ने धन के उत्पादकता और विनियोग की समझ नहीं रखते हैं ! पर उसकी चर्चा बहुत अधिक करते हैं ! यह लोग अपने धन अर्जित करने से अधिक दूसरों के बढ़ते हुए धन पर प्राय: चिंतित दिखाई देते हैं !

 यह लोग समस्या का समाधान नहीं ढूंढना चाहते बल्कि समस्या के उत्पत्ति का कारण किसी अन्य व्यक्ति, देश, काल, परिस्थिति को बतला कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं !

 ऐसे लोग जिम्मेदारी न उठाने के कारण प्राय: व्यापार, व्यवसाय और यदि नौकरी कर रहे हैं तो प्रतिष्ठानों में बहुत ही निचले स्तर पर अपना आउटपुट दे पाते हैं !

 ऐसे व्यक्तियों में किसी अन्य व्यक्ति से सीखने की इच्छा भी नहीं होती है और न ही यह लोग अपनी संपन्नता के लिए किसी भी किस्म का नया प्रयोग करने को तैयार होते हैं !

 यह लोग उधार मांगने और मौज मस्ती करने में बहुत विश्वास रखते हैं ! फर्जी आडंबर और दिखावा का इनके लिए बहुत महत्व होता है !

 तेज ध्वनि,  तेज रंग बिरंगी रोशनी,  अजीबो गरीब कपड़े,  अनावश्यक इलेक्ट्रोनिक गेजेट, किसी अन्य की बड़ी गाड़ी, किसी अन्य का बड़ा मकान, इन्हें बहुत अधिक प्रभावित करता है !

समय पर कार्य न करने की प्रवृत्ति,  पहले से अपने कार्य को करने हेतु तैयारी न रखने की प्रवृत्ति आदि ऐसे ही और भी बहुत से लक्षण हैं ! जिनसे दरिद्र प्रजाति के व्यक्ति को पहचाना जा सकता है !

इस तरह सिद्ध होता है कि दरिद्रता कोई सामाजिक दोष नहीं है बल्कि यह मनुष्य में एक विशेष प्रजाति है ! जिसे बदला नहीं जा सकता हैं !

इसलिए ऐसे व्यक्तियों को सुधारने में आप अपना बहुमूल्य समय नष्ट मत कीजिए अन्यथा यह लोग तो अपना प्रजाति परिवर्तन करके नहीं सुधरेंगे लेकिन इनको सुधारने के चक्कर में आप जरूर दरिद्र हो जाएंगे !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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