राम सेतु लगभग 18 लाख वर्ष पूर्व टायटनिक प्लेट के घर्षण द्वारा उत्पन्न हुआ, जो समुद्र तल तक गड़ा हुआ है | उस समय भगवान राम का जन्म भी नहीं हुआ था और न ही रावण पैदा हुआ था !
जबकि वर्तमान मानव जाति की उत्पत्ति ही लगभग एक लाख साल पहले हुई है ! जिससे सिद्ध होता है राम सेतु राम ने नहीं बनाया था !
जबकि इसी प्रकार का एक प्राकृतिक सेतु जापान-कोरिया के बीच में भी है और राम सेतु से कई गुना बड़ा है !
ऐसा ही एक सेतु तुर्की के द्वीपों के मध्य भी मिलता है ।
राम सेतु पर नासा ने रिसर्च कर बताया कि यह पुल प्रकृति निर्मित है, मानव निर्मित नहीं है ।
यह समुद्र में पाये जाने वाले मूँगा पत्थर से निर्मित है जो ज्वालामुखी का अवशेष होता है ! जो समुद्र के लहरों के साथ बहते बहते किसी एक जगह जल दबाव से इकठ्ठा हो जाता है ! यह कैल्शियम कार्बोनेट के टुकड़ों से निर्मित श्रंखला है ।
जिसकी लंबाई 30Km. है । नासा ने इसके सैम्पल लेकर रेडियो कार्बन परिक्षण से बताया कि यह सेतु 17.5 लाख वर्ष पुराना है ।
मूंगा समुद्र के कम गहरे पानी में जमा होकर श्रंखला बनाते है । विश्व में मूँगा से निर्मित ऐसी 10 से अधिक श्रृंखलाएँ है !
इनमे से सबसे बड़ी श्रृंखला ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट पर है । इसकी लंबाई रामसेतु से भी कई गुणा अधिक 2500 किलोमीटर की है ।
विश्व की इन सभी देशों की मूँगा श्रंखलाओं को सेटेलाईट के द्वारा देखा जा चूका है । जबकि हमारे पास बस सिर्फ कपोल कल्पित आस्था के अलावा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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