कर्ण पिशाचिनी और कर्ण यक्षिणी साधना में अंतर : Yogesh Mishra

 अनादि काल से इस सृष्टि में दो तरह की ऊर्जायें समानांतर कार्य कर रही हैं ! एक देव ऊर्जा और दूसरी असुर ऊर्जा ! देव ऊर्जायें आपके सहयोग के साथ-साथ आपकी जीवनी ऊर्जा का उधर्वगामी विस्तार करती हैं !

 जबकि इसके विपरीत आसुरी ऊर्जायें आपके ही जीवनी ऊर्जा से अपना पोषण करके आप पर आश्रित होकर उनका निरंतर पतन करती हैं !

 लेकिन मुख्य बात यह है कि देव ऊर्जायें जब तक कि आपका व्यक्तित्व दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित नहीं होता है, तब तक आपके साथ सहयोग नहीं करती हैं !

जबकि इसके विपरीत आसुरी ऊर्जायें क्योंकि आपकी जीवनी ऊर्जा से अपना पोषण करती हैं, इसलिए आपका किसी भी हाल में सहयोग करने के लिये तैय्यार रहती हैं ! इनका किसी के कल्याण से कोई लेना देना नहीं है !

 इसी लिये आसुरी ऊर्जायें बहुत आसानी से सिद्ध हो जाती हैं, जबकि देव ऊर्जाओं को सिद्ध करने में साधक को अधिक समय देना पड़ता है ! साथ ही अपने को देव ऊर्जा के अनुकूल बनाना पड़ता है !

 यही स्थिति भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने की इच्छा रखने वाले साधकों की भी है ! ऐसे साधकों को भूत, भविष्य, वर्तमान बतलाने वाली दो ऊर्जायें हमारी प्रकृति में मौजूद हैं !

 एक कर्ण पिशाचिनी दूसरा कर्ण याक्षणी ! कर्ण पिशाचिनी आसुरी ऊर्जा है ! जो आपकी जीवनी ऊर्जा से अपना पोषण करती है और आसानी से सिद्ध हो जाती हैं !

 जबकि इसके विपरीत कर्ण यक्षिणी देव ऊर्जा की श्रेणी में आती हैं और इन्हें सिद्ध करने के लिए आपको अपने चरित्र और व्यक्तित्व में देवत्व अर्थात दूसरे के कल्याण के भाव को बढ़ाना पड़ता है !

 लेकिन कर्ण यक्षिणी आपको भूत, भविष्य, वर्तमान की सूचना देते हुए भी आपके जीवनी ऊर्जा का पतन नहीं करती हैं, बल्कि आपको अपने कल्याण का मार्ग भी बतलाती हैं !

हमारे बहुत से ग्रंथ हमारे पूर्वजों ने कर्ण यक्षिणी सिद्धियों के माध्यम से लिखे हैं ! जिनमें भविष्य पुराण, भविष्य मालिका, अगस्त नाढ़ी ग्रन्थ, भृगु सहिंता, रावण सहिता, मंदोदरी सहिंता आदि जैसे ग्रन्थ आते हैं !

 इसलिए मेरा सभी साधकों से आग्रह है कि यदि आप भूत, भविष्य, वर्तमान को जानने की इच्छा रखते हैं, तो सहज सिद्ध होने वाली कर्ण पिशाचिनी ऊर्जा की साधना न करके अपने और लोक कल्याण के लिए कर्ण यक्षिणी ऊर्जा की साधना कीजिए !

जो आपको भूत, भविष्य, वर्तमान बतलाते हुये आपके कल्याण में भी सहायक होगी ! इससे आपको सिद्धि भी प्राप्त होगी और आत्म कल्याण भी !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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