आधुनिक विज्ञान की भाषा में जिसे हम डी.एन.ए. अर्थात डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल कहते हैं ! यह हमको भगवान द्वारा दिया गया विशेष परिचय पत्र है ! जो पूरे जीवन कभी नहीं बदलता !
इसके अतिरिक्त एक विषय यह भी ध्यान रख लीजिए कि एक व्यक्ति के डी.एन.ए. पर आधारित हाथों की रेखाएं, आंख के रेटिना का डिजाइन और हृदय गति का अंतराल जिस तरह का होता है, वैसा ही किसी दूसरे व्यक्ति का इस सृष्टि के आदि से लेकर अंत तक दोबारा कभी नहीं होता है !
एक ही व्यक्ति जब बार-बार जन्म लेता है तब भी हर बार धरती पर आने पर उसका डी.एन.ए. हाथ की रेखा, आंख के रेटिना की डिजाइन और हृदय गति का अंतराल अलग अलग ही होता है !
अर्थात कहने का तात्पर्य है कि हम जितनी बार शरीर धारण करते हैं, उतनी बार ईश्वर द्वारा दिया गया परिचय पत्र अलग अलग होता है ! जिसे ईश्वर ही बदल सकता है, उसे बदलना मनुष्य के पुरुषार्थ का विषय नहीं है !
हमारे उंगलियों में रेखाएँ माँ के गर्भ मे लगभग 4 महीने की अवस्था में ही बननी शुरू हो जाती हैं ! यह रेखायें हमारे D.N.A. की भी सूचना देती हैं !
आश्चर्य है कि यह रेखाएँ किसी भी परिस्थिति में हमारे माता-पिता या संसार के किसी भी मानव से मेल नहीं खाती हैं ! रेखाएँ बनाने वाला इतना विशिष्ट है कि वह अरबों ख़रबो की संख्या में प्राणी जो इस संसार में हैं और जो गुजर चुके हैं ! उन सभी की उंगलियों में उपस्थित रेखायें अलग अलग ही होती हैं !
किसी दुर्घटना में जलने, कटने या मिटने पर यह रेखाएँ वापस उसी रूप में विकसित होती हैं ! जिनमें एक डॉट का भी अन्तर नही होता है ! कोई तो है जो यह सब व्यवस्थित कर रहा है, या चला रहा है ! शायद वहीं ईश्वर है जो हर चीज में सूक्ष्म से सूक्ष्म रूप में विद्यमान है, लेकिन हम उसे पहचान नहीं पा रहे हैं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553
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