ईश्वर ने नया चिंतन बंद कर दिया है : Yogesh Mishra

आजकल मैं शिव मार्तंड विषय का शैव ज्ञान की कक्षाएं ले रहा हूं ! उसमें भगवान शिव और मणि के मध्य जो अद्भुत संवाद हो रहा है, उसकी व्याख्या अपने सनातन ज्ञान पीठ परिवार के साथियों के साथ कर रहा हूं ! जिस पर मेरे एक बुजुर्ग साथी ने उत्सुकता प्रकट की कि यह संवाद हमारे किस ग्रंथ से लिया गया है !

अब प्रश्न यह है कि जिस सनातन संस्कृति के करोड़ों ग्रंथ तक्षशिला और नालंदा जैसे महान विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों में जलकर नष्ट कर दिए गए, वह क्या अगर भगवान शिव पुन: समाज के सामने प्रकट करना चाहते हैं, तो उस ज्ञान के लिए हमें ग्रंथ को ही प्रमाण के रूप में ढूंढने की आवश्यकता क्यों है ?

आज वैष्णव आचार्यों द्वारा फैलाई गयी, यह एक साधारण अवधारणा है कि जो कुछ ईश्वर सोच सकता है, समझ सकता है, विचार कर सकता है, अनुभूत कर सकता है, वह सब कुछ हमारे शास्त्रों में पहले से लिखा है ! और अगर कोई व्यक्ति ईश्वर के विलुप्त विचार को नए सिरे से समाज को लोकहित में देना चाहता है, तो समाज का प्रबुद्ध वर्ग यह जानना चाहता है कि वह विचार पूर्व के किस ग्रंथ से लिया गया है !

अब प्रश्न यह है कि क्या ईश्वर ने नये विचारों के साथ सोचना बंद कर दिया है और यदि ईश्वर ने सोचना बंद कर दिया, तो प्रति पल बदलती यह सृष्टि व्यवस्थित तरीके से चल कैसे रही है, इसमें नित्य नए विचार और घटनाओं का आदान-प्रदान कैसे हो रहा है और अगर ईश्वर ने नये आयामों पर सोचा बंद नहीं किया है, तो हम ईश्वर के नये विचारों की सूचना पुराने ग्रंथों में ढूंढने के लिए बाधित क्यों हैं ?

कही यह हमारी सीमित बुद्धि और नये को अस्वीकार करने की वृत्ति की सूचना तो नहीं है ? मुझे लगता है यह एक गहन संवाद का विषय है ! इस विषय पर आप सभी साथी अपनी राय अवश्य दीजिये ! जिससे समाज में एक स्वस्थ्य चिंतन की शुरुआत हो सके !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये

www.sanatangyanpeeth.in

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2491

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *