ठंड में रोज नहाना जरूरी नहीं है : Yogesh Mishra

(स्नान चोरों के लिये तर्क लेख)

जाड़े में रोज क्यों नहीं नहाना चाहिये !

जाड़े में रोज नहीं नहाने वाले लोगों की स्किन टोन अधिक मेंटन रहती हैं ! हेल्थ और लाइफ स्टाइल एक्सपर्ट्स के मुताबिक मानव शरीर में एंटीबॉडी बनाने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र को निश्चित मात्रा में कॉमन बैक्टीरिया सूक्ष्म जीवों की आवश्यकता होती है ! रोज नहीं नहाने वालों में यह बरकरार रहते हैं !

कई स्टडीज ये कहती हैं कि हमारी स्किन में खुद को साफ करने की बेहतर क्षमता होती है. अगर आप जिम नहीं जाते या रोजाना पसीना नहीं बहाते या धूल-मिट्टी में नहीं रहते हैं तो आपके लिए रोज नहाना जरूरी नहीं है !

युरोप के ठंडे मौसम के चलते इंग्लैंड पर क़रीब आधी शताब्दी (1558 से 1603) तक राज करने वाली महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम महीने में सिर्फ़ एक बार स्नान करती थीं और वो भी यदि उन्हें आवश्यकता महसूस होती थी !

उनके बाद राजा बनने वाले जेम्स प्रथम ने कभी स्नान ही नहीं किया !उनके दरबार में लोगों को शिकायत थी कि राजा के पास बैठने से उनके भी बालों में जूं पड़ जाती थी ! जेम्स खाने से पहले भी हाथ धोना आवश्यक नहीं समझते थे !

बहत्तर वर्षों तक फ़्रांस के शासक रहे लुई महान (चौदहवें) ने जीवन में सिर्फ़ तीन बार स्नान किया और तीन दशक तक स्पेन की महारानी रहने वाली इसाबेल प्रथम का दावा था कि वो जीवन में सिर्फ़ दो बार नहायी हैं !

नौकरों की फ़ौज और नहाने के लिये गरम पानी उपलब्ध होने के बावजूद राज परिवार का जब ये हाल था तो आम लोगों के बारे में सिर्फ़ कल्पना की जा सकती है !

सत्रहवीं सदी में भारत के नज़दीकी संपर्क में आने के बाद इंग्लैंड और यूरोप के लोगों में शारीरिक स्वच्छता की अवधारणा बनी और रोज नहाने के प्रति जागरूकता पैदा हुई ! इसके पहले यूरोप के लोग जाड़े में आठ महीने सामान्यत: स्नान ही नहीं करते थे !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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