अनादि काल से शासन सत्ता में रहने वाले राजा महाराजा अपने गुरु या आचार्य के माध्यम से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए तथा अपने प्रभाव और साम्राज्य के विस्तार के लिए तंत्र विधान से तैयार किए गये “मूल रक्षक कलावा” का प्रयोग करते चले आ रहे हैं !
यह कलावा योग्य आचार्य द्वारा तंत्र विधान से तैयार किया जाता है ! यह मूल्यत: भगवान शिव की कृपा प्राप्त करके बनाया जाता है ! जिससे नकारात्मक व्यक्ति तथा नकारात्मक ऊर्जा शासकों को अनावश्यक रूप से परेशान न करें !
जिससे शासक अपने जीवनी ऊर्जा का समग्र प्रयोग राष्ट्र और समाज के उत्तरोत्तर विकास में कर सके !
इस कलावा को तैयार करने के लिए कृष्ण पक्ष की प्रदोष तिथि से प्रक्रिया आरंभ की जाती है और 48 घंटे के अथक परिश्रम के बाद अमावस्या की रात्रि में यह कलावा तैयार होता है !
इसमें ध्यान यह देना चाहिए कि प्रदोष से अमावस्या के मध्य तिथि क्षय नहीं होना चाहिए !
वैष्णव विचारधारा के पोषकों ने इसी प्रक्रिया को पूर्णिमा के दिन अपनाते हुए इसे रक्षाबंधन नाम दिया है ! जो वर्ष में एक बार बनाया जाता है ! जिसमें वह काले धागे के स्थान पर पीले अर्थात विष्णु तथा लाल अर्थात लक्ष्मी जी के प्रतिनिधि रंग के धागों का प्रयोग किया जाता है ! जिसे अब हम लोगों ने आधुनिक समय में राखी में परिवर्तित कर दिया है !
मूल रक्षक कलावा शत्रु हन्ता होने के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी प्रयोग किया जाता है ! जिसे अब मजारों पर बिना किसी तांत्रिक प्रक्रिया को अपनाएं हुए मात्र आर्थिक लाभ प्राप्त करने की इच्छा से मजारों पर जाने वाले भक्तों पर विशेषकर लड़कियों के पैर में बांधा जाता है !
जब कि संपूर्ण सनातन धर्म दर्शन में जीवनी ऊर्जा को उधर्वगामी करने के लिए मूल रक्षक कलावा कमर के ऊपर हाथ अथवा गले में बांधे जाने का विधान है !
जबकि मजारों पर यह धागा जीवनी ऊर्जा को अधोगामी करने के लिए पैरों में बांधा जाता है, जोकि यह सनातन तंत्र विधान के सिद्धांतों के विपरीत है !
यदि आप बार-बार तंत्र के चपेट में आते हैं या आपकी कुंडली में लग्न कमजोर है या फिर लग्न, पंचम, नवम पर किसी भी क्रूर ग्रह या बाधक अथवा मारक ग्रह की दृष्टि पड़ रही है, या महादशा चक्र के अनुसार आपकी बाधक या मारक ग्रह की महादशा अथवा अंतर्दशा चल रही है, तो उस स्थिति में आपको अवश्य रूप से मूल रक्षक कलावा धारण करना चाहिए !
जिसे अरायण बदलने के साथ-साथ वर्ष में दो बार बदलना भी चाहिए !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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