प्रायः माना जाता है कि जन्म कुंडली में यदि मंगल देव 1,4,7,8 और 12 भाव में विद्यमान हो तो जातक की जन्मकुंडली में साधारणतया मांगलिक दोष का निर्माण होता है ! जिस कारण जातक का दांपत्य जीवन में भी बिखराव उत्पन्न हो जाता है !
जब कि यह सत्य नहीं है, यदि मंगल 1,4,7,8 ,12 भाव में विद्यमान हो तब भी कुछ ऐसी विशेष स्थिती होती है कि जिस कारण से मंगल देव मांगलिक दोष का निर्माण नहीं करते हैं !
तो आइए जानते हैं कि वह कौन सी स्थितियां होती है !
इसी तरह यदि मंगल जन्म कुंडली में योगकारक ग्रह कि श्रेणी में आते हैं, तो उस स्थिति में 1,4,7,8, 12 भाव में विद्यमान होकर भी मंगल का मांगलिक दोष नहीं बनता है !
यदि मंगल देव अपनी स्वराशि में स्थित हो तो उस स्थिति में भी उनका मांगलिक दोष भंग हो जाता है !
यदि सप्तमेश सप्तम भाव में स्थित हो अथवा सप्तमेश अपने सप्तम भाव के स्वामी को देख रहा हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है !
यदि जन्म कुंडली में गुरु या शुक्र केंद्र भाव में स्थित हो अथवा सप्तमेश के स्वामी पर दृष्टि रखते हों तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है !
यदि जन्म कुंडली में मंगल देव 1,4,7,8, 12 भाव में स्थित हो किंतु साथ में सूर्य देव स्थित हो और सूर्य से मंगल अस्त हो उस स्थिति में भी मंगल देव का मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है !
यदि मंगल जन्म कुंडली में उच्च राशि अर्थात मकर राशि में स्थित हो तो उनका मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है !
यदि वर वधु के गुण 27 से अधिक हो उस स्थिति में भी मांगलिक दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है !
इस प्रकार से मांगलिक दोष का निर्णय करने से पहले हमें जन्म कुंडली का इन 8 बिंदुओं का सूक्ष्म विवेचन के बाद यह निष्कर्ष निकलना चाहिये !
मेरे शोध का यह निष्कर्ष है कि 100 मांगलिक कुंडलियों में मात्र तीन कुंडलिया ही ऐसी होती है जिन्हें मांगलिक माना जा सकता है !
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मांगलिक दोष एक मात्र प्रपोगंडा है ! इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है !
किसी योग्य विशेषज्ञ से परामर्श के अनुसार ही यह निर्णय लेना चाहिए कि कोई भी कुंडली मांगलिक है अथवा नहीं !
अल्प ज्ञानी ज्योतिषी समाज में भय पैदा करके धन कमाने की इच्छा रखते हैं, उन से सावधान रहना चाहिए !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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