इस चेतावनी के पीछे का मूल संदेश एकदम सही है। हालाँकि, वैज्ञानिक रूप से वैश्विक तापमान हर वर्ष .5 डिग्री बढ़ने का दावा किया है किन्तु इस जलवायु परिवर्तन के कारण जो भयंकर लू लगातार चलेगी, वह अन्तः जानलेवा होगी। क्योंकि आपने अपने शरीर को प्रकृति के अनुरूप ढालना बंद कर दिया है !
मेरे इस कथन के दो वैज्ञानिक आधार हैं :-
पहला मानव शरीर में गर्मी के अनुसार खुद को ढालने की प्राकृतिक क्षमता होती है। लगातार AC (विशेषकर 24°C से कम) में रहने से हमारे शरीर की पसीना निकालने और तापमान नियंत्रित करने की जैविक प्रणाली सुस्त पड़ जाती है।
ऐसे में जब व्यक्ति अचानक बाहर की चिलचिलाती गर्मी में जब वह जाता है, तो शरीर ‘हीट शॉक’ बर्दाश्त नहीं कर पाती। प्राकृतिक अनुकूलन के अभाव में हीटस्ट्रोक और ऑर्गन फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह मृत्यु का कारण भी बन सकता है !
दूसरा AC कमरा ठंडा करने के लिए अंदर की गर्मी को बाहर फेंकते हैं, जिससे शहरों का बाहरी तापमान और बढ़ जाता है ! इसे अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव कहते हैं। इसके अलावा, AC में इस्तेमाल होने वाली गैसें (HFCs) और इसकी भारी बिजली खपत ग्लोबल वार्मिंग को भयानक रूप से बढ़ा रही है। जिसे नियंत्रित करके पृथ्वी का सामान्य तापमान 10 डिग्री तक गिराया जा सकता है !
मतलब हम खुद को कृत्रिम रूप से ठंडा रखने के लिए पूरी धरती को भट्टी में बदल रहे हैं। पूर्ण रूप से AC पर निर्भर रहने के बजाय, प्राकृतिक वेंटिलेशन अपना कर और शरीर को धीरे-धीरे गर्मी का आदी बना कर हम अपने जीवन, अस्तित्व और पर्यावरण तीनों की रक्षा कर सकते हैं !।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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